Homeदेश-समाजमोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, UK के गृह मंत्रालय ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण...

मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, UK के गृह मंत्रालय ने विजय माल्या के प्रत्यर्पण को दी मंजूरी

विजय माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी को मोदी सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है

ब्रिटेन के गृह सचिव ने भारत के भगौड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण की मंजूरी प्रदान कर दी है। ये मोदी सरकार के लिए एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। काफी समय से भारत सरकार कूटनीतिक तरीके से विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर प्रयासरत थी, जिसमें आज उसे सफलता मिल गई है।

कुछ दिन पहले ही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने विजय माल्या से सम्बंधित बैंक खातों में धनराशि को अवरुद्ध करने के लिए स्विस अधिकारियों से अनुरोध किया था, साथ ही उसके खातों का विवरण प्रदान करने की भी माँग की थी। स्विटजरलैंड की शीर्ष अदालत द्वारा सूचना प्रदान करने को मंजूरी मिलने के बाद दोनों देशों के अधिकारियों द्वारा पहल शुरू की जा चुकी थी।

सीबीआई ने स्विस अधिकारियों से इस बात का अनुरोध किया था कि वो भगौड़े व्यापारी विजय माल्या के चार बैंक अकाउंट में आने वाले फंड को रोक दें। जिसके बाद जेनेवा के सरकारी वकील ने न केवल सीबीआई द्वारा किए इस अनुरोध का 14 अगस्त 2018 को पालन किया और माल्या के अन्य तीन बैंक अकाउंट की जानकारियों को भी साझा की थी। साथ ही उन पाँच कंपनियों की भी जानकारी सीबीआई को दी, जिनका संबंध माल्या से है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -