Saturday, February 24, 2024
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UP: नोटिस मिलते ही अवैध निर्माण छोड़ भागे, अब ‘100 साल पुरानी मस्जिद ढाहने’ का कर रहे प्रलाप

जिलाधिकारी आदर्श सिंह के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन ने अवैध आवासीय परिसर पर कार्रवाई की। इसके बाद प्रशासन पर 100 साल पुरानी ‘गरीब नवाज’ मस्जिद को तोड़ने का आरोप लगाते हुए प्रोपेगेंडा बढ़ाया गया। राम सनेही घाट पर बने तहसील दफ्तर के पास ये अवैध निर्माण किए गए थे।

स्थानीय प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसके पुननिर्माण की माँग की है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाराबंकी प्रशासन के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही है। मस्जिद प्रबंधन कमेटी ने स्थानीय प्रशासन पर साजिश का आरोप लगाया है। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष साबिर अली ने स्थानीय अधिकारियों पर मस्जिद को रातोंरात ढहाने और पुलिस बल की मौजूदगी में इसका मलबा हटाने का आरोप लगाया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड का कहना है कि मस्जिद पंजीकृत था। इसके खिलाफ कोर्ट ने भी कोई आदेश नहीं दिए थे। बोर्ड ने बुधवार (19 मई) को जारी बयान में कहा, “हम कथित रूप से अतिक्रमण हटाने के नाम पर तहसील परिसर के पास स्थित 100 साल पुरानी मस्जिद को गिराने के लिए, तहसील और जिला प्रशासन की, खासकर सब डिविजनल मजिस्ट्रेट की, अवैध और उच्चस्तरीय कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में मस्जिद कमेटी को मार्च में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।, जिसका कमेटी ने 1 अप्रैल को जवाब दिया। बोर्ड का कहना है कि उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में नहीं बताया गया था। इसे ढहाए जाने के समय मस्जिद बंद थी और लोगों का प्रवेश रोकने के लिए बैरीकेड लगे हुए थे।

जिलाधिकारी ने बताई कार्रवाई की वजह

प्रशासन की इस कार्रवाई पर डीएम डॉ आदर्श सिंह ने कहा कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था। लेकिन नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा इस पर अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।

जिलाधिकारी आदर्श सिंह के मुताबिक इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इस मामले को निस्तारित करने पर यह सिद्ध हुआ कि आवासीय निर्माण अवैध है। इसी आधार पर उपजिला मजिस्ट्रेट रामसनेहीघाट न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत पारित आदेश का अनुपालन 17 मई 2021 को कराया गया।

पुनर्निर्माण की माँग

ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के कार्यकारी महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने इस मस्जिद के गिरने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ” हमारी माँग है कि सरकार उच्च न्यायालय के जरिए इस मामले की जाँच कराए और जिन अफसरों ने यह गैरकानूनी हरकत की है उन्हें निलंबित किया जाए। साथ ही मस्जिद के मलबे को वहाँ से हटाने की कार्रवाई को रोककर और वैसी की वैसी हालत बरकरार रखें। इस जमीन पर कोई दूसरी तामीर करने की कोशिश न की जाए….यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उस जगह पर मस्जिद का निर्माण करे और उसे मुसलमानों को सौंप दे।”

वहीं समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष मौलाना अयाज अहमद ने भी कहा कि रामसनेही घाट स्थित गरीब नवाज मस्जिद को ढहा दिया गया है। यह अत्यंत शर्मनाक घटना है। बाराबंकी हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र रहा है। पुलिस प्रशासन ने सोमवार रात कोरोना कर्फ्यू की आड़ में रामसनेहीघाट की गरीब नवाज मस्जिद को शहीद कर दिया। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है और यह आजादी से पहले की बनी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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