Homeदेश-समाजजाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में...

जाँच आयोग के सामने पलटे अर्बन नक्सल, रिटायर जज बोले- वापस जेल में डाल दो

पिछले साल गाडलिंग और धावले को भीमा कोरेगॉंव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल पुणे के यरवदा जेल में बंद हैं। गाडलिंग ने कहा था कि वह कुछ तथ्यों को सामने लाने के लिए बयान देना चाहता है।

भीमा कोरेगॉंव हिंसा मामले की जॉंच के लिए गठित आयोग के सामने कुछ अर्बन नक्सलियों ने बयान देने से इनकार कर दिया। इससे पहले इन्होंने आयोग के सामने पेश होकर बयान देने की इच्छा जताई थी। लेकिन, पेशी के दौरान बयान देने की बात से पलट गए। इसके बाद आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस जय नारायण पटेल ने उन्हें दोबारा जेल भेज देने के निर्देश दिए।

आयोग के सामने अर्बन नक्सल सुरेंद्र गाडलिंग ने यह कहते हुए बयान देने से इनकार कर दिया कि इससे ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई पर असर पड़ेगा। गाडलिंग ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में उसकी दलीलों पर कोई असर न पड़े, इसीलिए वह जाँच आयोग को बयान नहीं देगा। हालाँकि, इससे पहले वकील सुरेंद्र गाडलिंग बयान देने को राजी था

गाडलिंग को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए 6 सितम्बर की तारीख दी गई थी। उसके अलावा एक अन्य अर्बन नक्सल सुधीर धावले को भी 7 सितम्बर को पेश होने को कहा गया था। न सिर्फ़ गाडलिंग बल्कि धावले ने भी बयान दर्ज कराने से मना कर दिया है। दोनों फिलहाल पुणे स्थित यरवदा जेल में बंद हैं। इन्हें पिछले वर्ष भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

पुणे पुलिस ने गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत गाडलिंग व धवले सहित अन्य को गिरफ्तार किया था। इससे पहले गाडलिंग ने कहा था कि वह कुछ तथ्यों को सामने लाने के लिए बयान देना चाहता है। गाडलिंग द्वारा बयान देने से मना करने पर उसे वापस यरवदा जेल में भेज दिया गया है। आश्चर्य की बात यह भी है कि एल्गार परिषद मामले में एक अन्य आरोपी सुधीर धावले ने भी एक आवेदन दाखिल किया था और आयोग के समक्ष बयान देने का आग्रह किया था, लेकिन अब उसने भी मना कर दिया है।

धावले एल्गार परिषद के आयोजकों में से एक था। एल्गार परिषद ने माओवादियों के समर्थन से भीमा कोरेगाँव युद्ध की बरसी पर हिंसा भड़काई थी। आरोप है कि इन अर्बन नक्सलियों ने हिंसा भड़काने के लिए एक कार्यक्रम का सहारा लिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -