ममता के बंगाल में सरस्वती पूजा को लेकर हिन्दू छात्रों को पीटा गया, शिक्षक ने टॉयलेट में छिपकर बचाई जान

“इस पर कुछ बोलने से पहले मुझे इसके बारे में जानकारी इकट्ठा करनी होगी। कथित तौर पर स्थानीय लोगों के दबाव में पूजा को 2009 में रोक दिया गया। स्कूल के 1700 छात्रों में से लगभग 75% छात्र मुस्लिम हैं, जबकि अधिकांश शिक्षक हिन्दू हैं।”

पश्चिम बंगाल के बसीरहाट उपमंडल के चौहट्टा गाँव में बुधवार (22 जनवरी) को छात्रों के एक समूह ने पिछले 8 सालों से आदर्श विद्यापीठ के स्कूल अधिकारियों द्वारा बंद की गई सरस्वती पूजा को फिर से शुरू करने की माँग की। दरअसल, इससे पहले भी कई बार इस तरह का अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन स्कूूल प्रशासन ने छात्रों की इस माँग पर कभी कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इस सन्दर्भ में स्कूल के छात्रों ने अब वर्तमान हेडमास्टर, हिमांशु शेखर मंडल को एक प्रस्ताव पेश किया। इसमें उन्होंने सरस्वती पूजा की व्यवस्था करने को कहा था। 

ख़बर के अनुसार, छात्रों ने स्कूल के गेट पर भी ताला लगा दिया और बोयलघट्टा-कोलूपुकुर रोड पर जाम लगा दिया। इस दौरान, कम से कम पाँच छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। चश्मदीदों के मुताबिक़, चोट लगने की वजह से दो छात्रों की नाक से ख़ून निकल रहा था और उन्हें प्राथमिक इलाज दिया गया। वहीं, इंग्लिश के एक अध्यापक गणेश सरदार ने आरोप लगाया कि भीड़ उन्हें ढूँढ रही थी, उन्हें टॉयलेट के अंदर छिपा दिया गया था। उन्होंने बताया कि अगर ज़िला प्रशासन समय पर आकर कार्रवाई न करता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी। हारो पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी ने उन्हें बचाया।  

अध्यापक ने बताया कि उन्हें भीड़ ने निशाना बना रखा था इस की एक वजह यह भी है कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबद्ध एक शिक्षक निकाय के ज़िला महासचिव हैं। उन्होंने बताया कि वो नबी दिवस और सरस्वती पूजा दोनों की सहमति दे चुके हैं। लेकिन, इस मामले में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस की राज्य मंत्री और जिला अध्यक्ष ज्योति प्रिया मल्लिक को कुछ नहीं मालूम। यहाँ तक कि ममता बनर्जी भी इस मुद्दे पर मौन हैं।

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उन्होंने कहा, “इस पर कुछ बोलने से पहले मुझे इसके बारे में जानकारी इकट्ठा करनी होगी। कथित तौर पर स्थानीय लोगों के दबाव में पूजा को 2009 में रोक दिया गया। स्कूल के 1700 छात्रों में से लगभग 75% छात्र मुस्लिम हैं, जबकि अधिकांश शिक्षक हिन्दू हैं।”

जानकारी के अनुसार, स्कूल के पूर्व हेडमास्टर, अशोक चंद्र सरकार ने पिछले कई वर्षों से सरस्वति पूजा पर रोक लगा रखी थी। उनके बाद, श्री मंडल, जिन्होंने छ: महीने पहले ही स्कूल ज्वॉइन किया है उन्होंने इस सबके लिए स्कूल प्रबंधन समिति को दोषी ठहराया है। स्कूल में छात्रों के विरोध के कारण, जिसमें लगभग 1700 छात्र हैं, वार्षिक खेल बैठक को भी रद्द करना पड़ा।

बता दें कि स्कूल में अंतिम बार सरस्वती पूजा का आयोजन 2012 में किया गया था। इसके बाद हुई झड़पों के बाद पूजा बंद कर दी गई थी। हर साल छात्र शिक्षा की देवी को समर्पित सरस्वति पूजा के आयोजन की माँग करते हैं, लेकिन हर साल स्कूल प्रबंधन समिति द्वारा इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया जाता है। हेडमास्टर हिमांशु शेखर मंडल ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें स्कूल में सरस्वति पूजा के आयोजन करने के लिए इच्छुक छात्रों का अनुरोध प्राप्त हुआ है। इस पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने इस प्रस्ताव को प्रबंधन समिति को भेज दिया है, लेकि इस बारे में अभी तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरस्वति पूजा को लेकर इलाक़े के कुछ मुसलमानों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद से स्कूलों में सरस्वती पूजा बंद कर दी गई। मुसलमानों ने माँग की थी कि स्कूलों में अगर सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाएगा, तो स्कूल प्रशासन को नबी दिवस (पैगंबर दिवस) भी आयोजित करना होगा। इसके बाद, स्कूल प्रबंधन समिति ने फ़ैसला किया था कि स्कूल में न तो सरस्वति पूजा का आयोजन होगा और न ही नबी दिवस आयोजित किया जाएगा।

2017 में मुस्लिम ग्रामीणों ने एक स्थानीय स्कूल को सरस्वती पूजा मनाने से रोक दिया था। उन्होंने कथित तौर पर स्कूल अधिकारियों को नबी दिवस (पैगंबर दिवस) मनाने के लिए कहा था। मुस्लिम समुदाय द्वारा की गई माँगों को अस्वीकार करने के बाद स्कूल को 26 दिनों के लिए बंद करना पड़ा था।

ग़ौरतलब है कि नुसरत जहाँ बशीरहाट निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा संसद सदस्य हैं, जहाँ की मुस्लिम आबादी लगभग 54% है। ऐसा पहली बार नहीं है जब बशीरहाट से कोई विवादास्पद घटना सामने आई हो। यह क्षेत्र हमेशा से साम्प्रदायिक हिंसा का केंद्र रहा है। 3 साल पहले, एक किशोरी के फेसबुक पोस्ट पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन ने उसके साथ हिंसात्मक गतिविधि को अंजाम दिया था।

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