Tuesday, October 19, 2021
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर PM मोदी के ट्विटर अकाउंट को संभालने वाली 7 महिला अचीवर्स

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर देश की 7 महिलाओं ने पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट के जरिए अपनी कहानियों को देश के लोगों तक पहुँचा उन्हें प्रेरित करने का काम किया।

आज रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर देश की 7 महिलाओं ने पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट के जरिए अपनी कहानियों को देश के लोगों तक पहुँचा उन्हें प्रेरित करने का काम किया। पिछले हफ्ते एक अस्पष्ट से ट्वीट में मोदी ने सोशल मीडिया एकाउंट्स को त्यागने की बात कही थी, जिसके बाद तरह तरह की अटकलों का बाजार गर्म था। लेकिन एक दिन बाद पीएम मोदी ने अपनी मंशा साफ़ करते हुए बताया था कि उनका इरादा 8 मार्च को एक दिन के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को उन महिला अचीवर्स के सुपुर्द करने का है, जिनकी कहानियाँ हमें प्रेरित करती हैं।

आज सुबह देश की महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि जैसा मैंने कुछ दिन पहले कहा था, आज मेरा सोशल अकाउंट 7 महिलाओं के पास रहेगा, जो अपनी प्रेरणादायक कहानियाँ साझा करेंगीं और शायद आपसे मेरे सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए संवाद भी स्थापित करेंगी।

जिन 7 महिलाओं को आज पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने का मौका मिला, वो सभी अलग अलग क्षेत्रों से संबंध रखती हैं। इनमें जल संरक्षण से लेकर दिव्यांग जनों के लिए काम करने वाली स्त्रियाँ भी शामिल हैं। मोदी ने इन सातों महिलाओं का एक संक्षिप्त वीडियो अपने ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया।

ये रहीं वे 7 स्त्रियां जिन्होंने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट का संचालन किया:

स्नेहा मोहनदास

पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट संचालित करने वाली पहली महिला एचीवर आज चेन्नई की स्नेहा मोहनदास रहीं जिन्होंने ‘फूडबैंक’ नामक संगठन की स्थापना की है। जो बेघरबार लोगों तक भोजन पहुँचाने का काम करता है। स्नेहा मोहनदास ने अपनी इस यात्रा को साझा करते हुए लोगों से भूखों की मदद कर भूखविहीन ग्रह के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने अपनी इस प्रेरक जीवन यात्रा के पीछे अपनी माँ के योगदान को याद किया जिन्होंने उनमें भूखों को खाना खिलाने की आदत विकसित की थी।

मालविका अय्यर

पीएम मोदी का ट्विटर अकाउंट उपयोग कर अपनी कहानी देश के साथ साझा करने वाली दूसरी महिला मालविका अय्यर थीं, जिन्होंने 13 साल की उम्र में भयानक बम ब्लास्ट में अपने हाथों को खो दिया था। बम ब्लास्ट में अपने हाथ गँवाने और पैरों का काफी नुक्सान देखने के बाद भी मालविका ने अपनी हिम्मत और मानसिक मजबूती के दम पर पीएचडी पूरी करने में सफलता प्राप्त की। मालविका ने पीएम मोदी के ट्विटर अकाउंट के जरिए देश के युवाओं से दिव्यांगों और दिव्यांगता के प्रति अपने दृष्टिकोण में सुधार लाने की अपील की।

आरिफा

तीसरी महिला आरिफा हैं, जिन्होंने कश्मीर में महिला कारीगरों की जिंदगी बदलने का काम किया है। आरिफा कश्मीर की पारम्परिक नमदा बुनकर हैं। नमदा बुनकर ऊन के कार्पेट बनाती हैं। कश्मीर की इस लुप्त होती कला को आरिफा ने नया जीवन दिया है।

कल्पना

कल्पना हैदराबाद की हैं जो आर्किटेक्ट हैं। ये रेन वाटर हार्वेस्टिंग के क्षेत्र में काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण करने की जरूरत है। इसके लिए हमें जल के पुनर्चक्रण, झीलों को बचाना, वर्षा जल का संचयन आदि आदि के विषय में जागरूकता पैदा करनी होगी।

विजया पवार

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके से आने वालीं विजया पवार ने बंजारा समुदाय की गोरमाटी कला और हस्तशिल्प पर अपनी बात रखी।

विजया ने कहा, “गोरमाटी कला को बढ़ावा देने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने न केवल हमें प्रोत्साहित किया बल्कि हमारी आर्थिक सहायता भी की। ये हमारे लिए गौरव की बात है। इस कला के संरक्षण के लिए मैं पूरी तरह से समर्पित हूँ और महिला दिवस के अवसर पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ।”

कलावती

कानपुर की कलावती देश की बहन, बेटी और बहुओं को संदेश देतीं हैं कि समाज को आगे ले जाने के लिए ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं होता।

कलावती लिखती हैं, “मैं जिस जगह पर रहती थी, वहाँ हर तरफ गंदगी ही गंदगी थी। लेकिन दृढ़ विश्वास था कि स्वच्छता के जरिए हम इस स्थिति को बदल सकते हैं। लोगों को समझाने का फैसला किया। शौचालय बनाने के लिए घूम-घूमकर एक-एक पैसा इकट्ठा किया। आखिरकार सफलता हाथ लगी। स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता जरूरी है। इसके लिए लोगों को जागरूक करने में थोड़ा समय जरूर लगा। लेकिन मुझे पता था कि अगर लोग समझेंगे तो काम आगे बढ़ जाएगा। मेरा अरमान पूरा हुआ, स्वच्छता को लेकर मेरा प्रयास सफल हुआ। हजारों शौचालय बनवाने में हमें सफलता मिली है। अगर कोई कड़वी भाषा बोलता है तो उसे बोलने दीजिए।अगर अपने लक्ष्य को पाना है तो पीछे मुड़कर नहीं देखा करते हैं।”

वीणा देवी

“जहाँ चाह वहाँ राह… इच्छा शक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। मेरी वास्तविक पहचान पलंग के नीचे एक किलो मशरूम की खेती से शुरू हुई थी। लेकिन इस खेती ने मुझे न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाकर एक नया जीवन दिया।”

मुंगेर की वीणा देवी आगे अपनी कहानी बताते हुए कहती हैं- “आज महिलाएँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अगर देश की नारी शक्ति ठान ले तो घर के अपने कमरे से ही अपनी यात्रा शुरू कर सकती है। इसी खेती की वजह से मुझे सम्मान मिला। मैं सरपंच बनी। मेरे लिए खुशी की बात है कि अपने जैसी कई महिलाओं को ट्रेनिंग देने का अवसर भी मिल रहा है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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