‘मेरा काम मियाँ लोगों को तकलीफ देना’: CM हिमंता का बांग्लादेशी घुसपैठियों पर तीखा बयान, कहा- चुन-चुनकर वोटर लिस्ट से बाहर निकालेंगे

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की बदलती आबादी और ‘मियाँ’ मुसलमानों को लेकर अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार (28 जनवरी 2026) को उन्होंने दोटूक कहा कि असमिया पहचान बचाने के लिए अगले 30 साल तक ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने साफ ऐलान किया कि राज्य की वोटर लिस्ट से करीब 4 से 5 लाख ‘मियाँ’ वोटरों के नाम हर हाल में हटाए जाएँगे, क्योंकि उन्हें असम में नहीं बल्कि बांग्लादेश में वोट डालने का हक होना चाहिए।

‘मियाँ परेशान नहीं हुए, तो तिनसुकिया पर कब्जा कर लेंगे’

मुख्यमंत्री ने विपक्ष और कॉन्ग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस मुझे भले गाली दे, लेकिन मेरा काम मियाँ लोगों को तकलीफ देना है।” सीएम सरमा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर मियाँ लोग परेशान नहीं होंगे, तो वे दुलियाजान और तिनसुकिया जैसे इलाकों में घुस आएँगे।

सीएम हिमंता ने तिनसुकिया में जमीन के लेन-देन की एक लिस्ट का हवाला देते हुए चिंता जताई कि हिंदू अपनी जमीनें बेच रहे हैं और मियाँ मुसलमान उन्हें खरीद रहे हैं। सीएम ने सवाल उठाया, “अगर हम अभी सावधान नहीं हुए, तो कब होंगे?”

वोटर लिस्ट से होगी लाखों ‘मियाँ’ वोटरों की छुट्टी

सोमवार (26 जनवरी 2026) को तिनसुकिया के डिगबोई में सीएम ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में जो सुधार चल रहा है, उसका मकसद यही है कि मियाँ लोग वोट न दे सकें। सीएम हिमंता ने कहा, “यह तो अभी शुरुआत है। जब राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) लागू होगा, तब 4 से 5 लाख मियाँ वोटों को चुन-चुनकर लिस्ट से बाहर किया जाएगा।” उनके मुताबिक, यह ध्रुवीकरण हिंदू-मुस्लिम के बीच नहीं, बल्कि ‘असमिया बनाम बांग्लादेशी’ के बीच है, जिसमें असमिया मुसलमान उनके दुश्मन नहीं हैं।

‘आत्मसमर्पण नहीं, आखिरी दम तक लड़ेंगे’

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह एक असमिया होने के नाते कभी घुटने नहीं टेकेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग जनसांख्यिकीय बदलाव के आगे हार मान चुके हैं, वे आत्मसमर्पण कर दें, लेकिन वह लड़ेंगे और ध्रुवीकरण करेंगे। हिमंता बिस्वा सरमा ने साफ कर दिया कि घुसपैठियों के कारण राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान खतरे में है और इसे बचाने के लिए कड़े कदम उठाना अब वक्त की जरूरत है।