मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। देश में ईंधन और बिजली बचाने के लिए सरकार ने सोमवार (9 मार्च 2026) से सभी सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह कदम आपातकालीन उपाय के तौर पर उठाया गया है ताकि देश में बढ़ती ऊर्जा समस्या को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके।
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार ने ऊर्जा संकट के गहराने के बाद ईद की छुट्टियों को बढ़ा दिया है। सरकार का मानना है कि विश्वविद्यालयों को बंद करने से बिजली की खपत कम होगी और सड़कों पर यातायात भी घटेगा, जिससे ईंधन की बचत होगी।
बांग्लादेश सरकार के अधिकारियों के मुताबिक विश्वविद्यालयों में आवासीय छात्रावास, कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ और AC चलाने के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। ऐसे में अगर ईद की छुट्टियाँ पहले कर दी जाएँ और विश्वविद्यालय बंद कर दिए जाएँ तो बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होगा।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में सरकारी और निजी स्कूलों को पहले ही पूरे रमजान महीने के लिए बंद किया जा चुका है। यह इस्लामिक मुल्क अपनी कुल घरेलू ऊर्जा जरूरतों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने पर वहाँ ऊर्जा संकट जल्दी पैदा हो जाता है।
मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने ईंधन की खरीद पर रोजाना की सीमा भी तय कर दी है। इसके अलावा निजी कोचिंग सेंटर और विदेशी पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले स्कूलों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। ईंधन की कमी का असर उद्योगों पर भी पड़ा है। इसी वजह से बांग्लादेश की 4 सरकारी उर्वरक फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद करना पड़ा है।
According to multiple sources, the government has taken this initiative on an urgent basis to maintain normal fuel stocks and ensure uninterrupted supply. The proposal sent by the government to these two Indian companies has requested them to start the process of supplying 50,000 tons of diesel to Bangladesh within the next four months.
बांग्लादेश ने भारत से माँगी मदद
इस बीच ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से मदद भी माँगी है। ऊर्जा सुरक्षा के तहत ढाका ने भारत से अगले चार महीनों के भीतर 50,000 टन डीजल की आपूर्ति करने का अनुरोध किया है। यह डीजल भारत की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से माँगा गया है।
रविवार 8 मार्च को संबंधित सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश सरकार ने यह पहल इसलिए की है ताकि देश में ईंधन का भंडार बनाए रखा जा सके और आपूर्ति में बाधा न आए।
सरकार की ओर से इन दोनों भारतीय कंपनियों को जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसमें उनसे अनुरोध किया गया है कि वे अगले चार महीनों के भीतर 50,000 टन डीजल की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू करें। माना जा रहा है कि यदि इन कंपनियों के साथ डीजल आयात समझौता पूरा हो जाता है तो इससे बांग्लादेश के मौजूदा ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिलेगी।

