बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने महिलाओं के नेतृत्व और कामकाजी जीवन पर विवादास्पद बयान देकर बड़ा बवाल खड़ा कर दिया। शफीकुर रहमान ने शनिवार (31 जनवरी 2026) को एक्स पर ‘नेतृत्व’ की स्थिति में महिलाओं की तुलना वेश्याओं से कर दी।
यह घटना बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से कुछ समय पहले हुई है।
अब डिलीट हो चुके अपने एक्स (पहले ट्विटर) पोस्ट में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी प्रमुख ने लिखा, “महिलाओं के सवाल पर जमात का स्टैंड न तो कन्फ्यूज है और न ही माफी माँगने वाला यह सिद्धांतों पर आधारित है। हमें नहीं लगता कि महिलाओं को नेतृत्व में आना चाहिए। जमात में यह नामुमकिन है। अल्लाह ने इसकी इजाजत नहीं दी।”
रहमान ने बेशर्मी से लिखा, “हमारा मानना है कि जब आधुनिकता के नाम पर महिलाओं को घर से बाहर धकेला जाता है, तो वे शोषण, नैतिक पतन और असुरक्षा के सामने आ जाती हैं। यह वेश्यावृत्ति का एक और रूप ही है।”
शफीकुर रहमान यहीं नहीं रुका। उसने आगे लिखा, “सोशल मीडिया पर अश्लीलता, कार्यस्थल पर उत्पीड़न और महिलाओं को वस्तु बनाने की प्रवृत्ति, ये प्रगति के संकेत नहीं हैं, ये नैतिक पतन के लक्षण हैं। हम अमर्यादितता से समझौता करने से इनकार करते हैं, चाहे वह कितनी भी फैशनेबल हो जाए।”

महिलाओं के बारे में उसकी अपमानजनक टिप्पणियों के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए।
नुकसान को नियंत्रित करने की कोशिश में बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी प्रमुख ने रविवार (1 फरवरी 2026) को दावा किया कि उनका एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट हैक कर लिया गया था।
उसने कहा, “वे झूठी खबरें फैलाकर और सोशल मीडिया हैक करके हमारी मुहिम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, और हमें साफ-साफ पता है कि वे कौन हैं। आज जो पार्टी हमें बदनाम करने की कोशिश कर रही है, उसी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिजाब पर हमला किया था, हमारी मां-बहनों की इज्जत को ठेस पहुँचाई थी और सार्वजनिक रूप से महिलाओं को पीटा और धमकाया था।”
रहमान ने अपने बचाव में कहा, “महिलाओं का सम्मान करने, उनकी गरिमा की रक्षा करने और उन्हें समाज में बराबर का साथी मानने की हमारी लंबी इतिहास रही है। हमारी नीतियाँ महिलाओं की सुरक्षा, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और बांग्लादेश बनाने में उनकी केंद्रीय भूमिका को मान्यता देने के लिए बनी हैं। जो राष्ट्र अपनी महिलाओं का अनादर करता है, वह आगे नहीं बढ़ सकता।”
यह बताना जरूरी है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने पाकिस्तानी फौज के साथ मिलकर महिलाओं, खासकर हिंदू समुदाय की महिलाओं पर जमकर अत्याचार किए थे।

