बांग्लादेश में हिंसा और भारी तनाव के बीच हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे आ गए हैं। कट्टरपंथी रुझानों के लिए पहचाने जाने वाले तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत का दावा किया है। जमुना टीवी के मुताबिक, BNP गठबंधन ने 300 में से 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया है।
17 साल का निर्वासन काटकर लौटे तारिक रहमान अब मुल्क के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इस जीत पर भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ गहरी हैं।
पीएम मोदी का ट्वीट: बधाई के साथ ‘समावेशी’ बांग्लादेश की याद
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (X) पर तारिक रहमान को बधाई देते हुए लिखा, “संसदीय चुनावों में BNP को निर्णायक जीत दिलाने के लिए मैं श्री तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देता हूँ। भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में खड़ा रहेगा। मैं साझा विकास लक्ष्यों के लिए आपके साथ काम करने को तत्पर हूँ।” जानकारों का मानना है कि ‘समावेशी’ शब्द का इस्तेमाल कर भारत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का संकेत दिया है।
I convey my warm congratulations to Mr. Tarique Rahman on leading BNP to a decisive victory in the Parliamentary elections in Bangladesh.
— Narendra Modi (@narendramodi) February 13, 2026
This victory shows the trust of the people of Bangladesh in your leadership.
India will continue to stand in support of a democratic,…
शेख हसीना का ‘बहिष्कार’ और चुनाव का माहौल
यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के तख्तापलट के बाद पहला बड़ा चुनावी परीक्षण था। अंतरिम सरकार के सलाहकार मोहम्मद यूनुस की देखरेख में हुए इन चुनावों में हसीना की पार्टी अवामी लीग को शामिल नहीं होने दिया गया। हसीना ने इसे ‘दिखावा’ बताया है। चुनाव के दौरान देश के कई हिस्सों से हिंसा और बमबारी की खबरें आईं, जिसके बाद अब कट्टरपंथी ताकतों का बोलबाला बढ़ने की आशंका है।
भारत विरोधी साजिश और अल्पसंख्यकों पर खतरा
तारिक रहमान का इतिहास भारत विरोधी रुख और हिंदू अल्पसंख्यकों के प्रति कठोरता वाला रहा है। BNP का नारा ‘फ्रेंड यस, मास्टर नो’ भारत के साथ पुराने रिश्तों को बदलने की कोशिश है। अतीत में BNP पर सीमा पर आतंकवादियों को शरण देने के आरोप लगे हैं। नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चुनौती सीमा सुरक्षा और बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं की रक्षा सुनिश्चित करना है।
चीन-पाकिस्तान का बढ़ता दखल
आशंका है कि तारिक रहमान के सत्ता में आने से बांग्लादेश अब पाकिस्तान और चीन के रणनीतिक जाल में फँस सकता है। साथ ही, नई सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की माँग कर भारत पर दबाव बनाने की साजिश रच सकती है। भले ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक मजबूरी हो, लेकिन कूटनीतिक मोर्चे पर भारत के लिए यह ‘सफर’ अब काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

