बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ‘नरसंहार दिवस’ के मौके पर 1971 में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों को याद किया है। तारिक रहमान ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए पाकिस्तानी सेना की बर्बरता की कहानी बताई है। रहमान ने इसे लेकर X पर एक लंबा पोस्ट लिखा है।
रहमान ने लिखा, “25 मार्च 1971 को नरसंहार दिवस के रूप में मनाया जाता है। बांग्लादेश के इतिहास में 25 मार्च 1971 सबसे शर्मनाक और क्रूर दिनों में से एक है। उस काली रात को पाकिस्तान की कब्जा करने वाली फौज ने ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के नाम पर बांग्लादेश के निहत्थे लोगों के खिलाफ इतिहास के सबसे जघन्य नरसंहारों में से एक को अंजाम दिया।” रहमान ने लिखा, “फौज ने ढाका विश्वविद्यालय, पिलखाना और राजारबाग पुलिस लाइन्स सहित विभिन्न स्थानों पर शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और निर्दोष नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कई लोग मारे गए।”
March 25, 1971 is observed as Genocide Day. On the occasion of Genocide Day, 1 pay my deepest respect to all the martyrs.
— Tarique Rahman (@trahmanbnp) March 24, 2026
In the history of freedom-loving Bangladesh, 25 March 1971 remains one of the most disgraceful and brutal days. On that dark night, the Pakistani occupation… pic.twitter.com/ENyyvnz8Tw
रहमान ने आगे लिखा, “25 मार्च का नरसंहार पहले से सोची-समझी एक सुनियोजित हत्या थी। यह सवाल आज भी इतिहास के शोध का विषय है कि उस समय के राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका के बावजूद इस संगठित हिंसा का ठीक से विरोध क्यों नहीं हो पाया। लेकिन 25 मार्च की रात चट्टोग्राम में 8वीं ईस्ट बंगाल रेजिमेंट ने ‘हम विद्रोह करते हैं’ की घोषणा करके इस नरसंहार के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध शुरू किया। इसी प्रतिरोध के साथ नौ महीने लंबा सशस्त्र मुक्ति युद्ध शुरू हुआ।”
बांग्लादेश के PM ने आगे लिखा, “आज और आने वाली पीढ़ियों को आजादी की कीमत और महत्व समझाने के लिए 25 मार्च के इस नरसंहार के बारे में जानना बहुत जरूरी है। आइए, हम सब मिलकर शहीदों के बलिदान का सम्मान करें और अपने देश व समाज में मुक्ति युद्ध की भावना समानता, मानव गरिमा और सामाजिक न्याय को स्थापित करें। हम सब मिलकर एक न्यायपूर्ण, विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश के निर्माण के लिए काम करें।”

