बांग्लादेश में हिंदू शिक्षक का घर फूँका, जान बचाकर भागा परिवार: नहीं रुक रहा यूनुस के राज में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइनघाट उपजिला का है, जहाँ एक हिंदू स्कूल शिक्षक के घर को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय के बीच डर और असुरक्षा की भावना को भी बढ़ा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिलहट के गोवाइनघाट इलाके में रहने वाले हिंदू शिक्षक बिरेन्द्र कुमार डे, जिन्हें स्थानीय लोग ‘झुनू सर’ के नाम से जानते हैं, के घर में अचानक आग लगा दी गई। आग इतनी तेजी से फैली कि घर में मौजूद परिवार के सदस्यों को जान बचाकर बाहर भागना पड़ा।

हालाँकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन घर को भारी नुकसान पहुँचा है और परिवार पूरी तरह सदमे में है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें घर को जलते हुए और लोगों को अफरा-तफरी में बाहर निकलते देखा जा सकता है।

फिलहाल किसी की गिरफ्तारी हुई है। स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय ने प्रशासन से निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

लगातार हो रही आगजनी, अंतरराष्ट्रीय चिंता और सरकार का इनकार

सिलहट की यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। बीते कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के कई जिलों में हिंदू परिवारों के घरों को निशाना बनाया गया है। दिसंबर के अंत में पीरोजपुर जिले के दुमरीतला गाँव में एक हिंदू परिवार के घर में आगजनी की गई थी।

इससे कुछ दिन पहले मयमनसिंह में 29 वर्षीय दीपु चंद्र दास की इस्लामी भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी और बाद में उनके शव को जला दिया गया था। इसके अलावा चटगाँव के राउजान इलाके में प्रवासी हिंदू परिवारों के घरों को आग के हवाले करने की घटना ने भी देशभर में आक्रोश पैदा किया।

आरोप है कि हमलावरों ने परिवारों को घर के अंदर बंद कर आग लगा दी, जिससे कई लोग छत और बाड़ काटकर जान बचाने को मजबूर हुए। बताया जा रहा है कि यह इलाका महज पाँच दिनों में अल्पसंख्यकों पर छठी आगजनी की घटना का गवाह बना था।

इन घटनाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है और भारत समेत कई देशों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है।