बंगाल के ‘मदर्स हट’ रेस्टोरेंट में बिना बताए हिंदुओं को परोसा जा रहा था ‘हलाल’ माँस, BJP कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा: मेन्यू में मीट का प्रकार लिखने की उठी माँग

पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में इन दिनों हलाल मीट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के पास भाटजांगला इलाके में स्थित मशहूर ‘मदर्स हट’ रेस्टोरेंट में यह सारा घटनाक्रम सामने आया है। यहाँ परोसे जाने वाले माँस के प्रकार को लेकर लोगों के बीच बड़ी बहस शुरू हो गई है।

इस रेस्टोरेंट में आने वाले आम ग्राहकों को यह पता नहीं होता है कि उन्हें जो माँस परोसा जा रहा है, वह हलाल है या झटका। स्थानीय लोगों और ग्राहकों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। इस पूरी घटना के बाद से पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई इसी की बात कर रहा है।

नादिया के इस रेस्टोरेंट में जब बीजेपी कार्यकर्ताओं को यह बात पता चली कि यहाँ केवल हलाल मीट ही परोसा जाता है, तो वे काफी भड़क गए। कार्यकर्ताओं ने रेस्टोरेंट के अंदर जाकर कर्मचारियों से परोसे जा रहे माँस के प्रकार के बारे में पूछताछ की थी। स्टाफ ने कन्फर्म किया कि उनके यहाँ केवल हलाल माँस ही परोसा जाता है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं की मुख्य माँगें और रेस्टोरेंट का पक्ष

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड पर साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि वे किस प्रकार का माँस परोस रहे हैं। कार्यकर्ताओं का यह भी तर्क है कि इस रेस्टोरेंट में कई हिंदू ग्राहक भी खाना खाने के लिए आते हैं।

बिना बताए उन्हें हलाल माँस परोसना बिल्कुल गलत है और यह उनकी आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है। इसके साथ ही उन्होंने माँग की है कि रेस्टोरेंट में झटका माँस का विकल्प भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि हर कोई अपनी पसंद का चुनाव कर सके।

रेस्टोरेंट के कर्मचारियों का कहना है कि उनके यहाँ हमेशा से केवल हलाल मीट ही परोसा जाता रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे झटका माँस नहीं रखते हैं और इस बारे में उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने की पूरी कोशिश भी की थी। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि आज तक किसी ग्राहक ने इसकी शिकायत नहीं की थी।

रेस्टोरेंट का जवाब और पुलिस की कार्रवाई

रेस्टोरेंट का तर्क है कि उनके यहाँ आने वाले ग्राहकों ने आज तक इस बात की कोई शिकायत नहीं की है। अगर किसी को भी खाने को लेकर कोई दिक्कत है, तो वे अपनी मर्जी से दूसरे रेस्टोरेंट में जा सकते हैं।

विवाद बढ़ने की सूचना मिलते ही कृष्णानगर के तुआली थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने रेस्टोरेंट के मैनेजर और बीजेपी कार्यकर्ताओं दोनों से बातचीत करके स्थिति को संभाला। राहत की बात यह है कि इस दौरान कोई हिंसा या किसी के चोट लगने की खबर सामने नहीं आई है और पुलिस इस पूरे मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है।

लोगों की प्रतिक्रियाएँ और सोशल मीडिया पर बवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद आम लोगों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कई लोगों ने इस पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि रेस्टोरेंट अपने ग्राहकों को साफ-साफ क्यों नहीं बताते कि मेन्यु में क्या परोसा जा रहा है और क्या नहीं। दुकान पर अगर साफ तौर पर नहीं लिखा होगा, तो कोई भी ग्राहक बिना जाने उसका सेवन कर सकता है।

सोशल मीडिया पर इस पूरे मुद्दे को लेकर काफी चर्चा चल रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर राष्ट्रीय प्रवक्ता हिंदू जागृति ऑर्गेनाइजेशन रमेश शिंदे ने इस बंगाल रेस्टोरेंट विवाद पर पोस्ट करते हुए ट्रांसपेरेंसी यानी पारदर्शिता की माँग की है।

एक अन्य यूजर दरब शेष सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि बहुत से लोग बिना यह जाने मीट खा लेते हैं कि इसे कैसे तैयार किया जाता है और अगर किसी को इससे आपत्ति है, तो वे विवाद पैदा करने के बजाय दूसरा रेस्टोरेंट चुन सकते हैं।