बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (5 मार्च 2026) को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) परिसर में नमाज पढ़ने के लिए अलग जगह देने की माँग को ठुकरा दिया है।
कोर्ट ने साफ कर दिया कि मामला चाहे धर्म का हो या किसी और चीज का, एयरपोर्ट जैसी संवेदनशील जगह पर सुरक्षा के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। यह याचिका टैक्सी और ओला-उबर ड्राइवरों के एक संगठन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें रमजान के महीने के दौरान नमाज के लिए अस्थायी जगह की माँग की गई थी।
क्या था पूरा मामला?
‘टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर एसोसिएशन’ ने कोर्ट में अर्जी दी थी कि डोमेस्टिक एयरपोर्ट (टर्मिनल 1) के पास एक पुराना प्रार्थना शेड हुआ करता था, जिसे अप्रैल 2025 में विकास कार्यों के दौरान हटा दिया गया था।
एसोसिएशन का कहना था कि वे पिछले 30 सालों से वहाँ नमाज पढ़ रहे थे। उन्होंने माँग की थी कि या तो उस शेड को फिर से बनाया जाए या रमजान के दौरान ड्राइवरों और यात्रियों के लिए 1,500 वर्ग फुट की कोई वैकल्पिक जगह दी जाए।
सुरक्षा ही सबसे सर्वोपरि: बॉम्बे HC
जस्टिस बीपी कोलाबाला और जस्टिस एफपी पूनीवाला की बेंच ने इस याचिका को खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। बेंच ने कहा, “जब सुरक्षा का जोखिम हो, तो सुरक्षा ही सबसे पहले आती है, चाहे धर्म कोई भी हो। सुरक्षा के मामले में हम रत्ती भर भी समझौता नहीं करेंगे।” कोर्ट ने माना कि एयरपोर्ट एक हाई-सिक्योरिटी जोन है और वहाँ बिना अनुमति के किसी भी संरचना को अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी का पक्ष
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस माँग का विरोध किया। सरकारी वकील ने बताया कि ड्राइवरों द्वारा सुझाई गई सातों जगहें सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं हैं क्योंकि वे वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट वाले रास्तों के करीब हैं।
सरकार ने यह भी दलील दी कि एयरपोर्ट के पास पैदल दूरी पर कम से कम तीन मस्जिदें मौजूद हैं, जहाँ ड्राइवर जाकर नमाज पढ़ सकते हैं। वहीं एयरपोर्ट प्रशासन (MIAL) ने कहा कि पुराना शेड वीआईपी गेट के पास था, जो सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता था।
समानता के तर्क पर कोर्ट की दो टूक
जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि पास में ही एक मंदिर भी बना है, तो कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी गलत उदाहरण के आधार पर सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “अगर कोई हमें बताएगा कि वह मंदिर भी अवैध है, तो हम उसे भी हटाने का आदेश देंगे। दो गलतियाँ मिलकर एक सही काम नहीं बना सकतीं।”
भविष्य के लिए खुला रखा रास्ता
हालाँकि कोर्ट ने ड्राइवरों की परेशानी को समझा और कहा कि प्रार्थना करना उनके मजहब का हिस्सा है। कोर्ट ने एसोसिएशन को यह छूट दी है कि वे भविष्य में एयरपोर्ट के पुनर्विकास (Redevelopment) के बाद जगह के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी (AAI) के पास आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल के लिए, सुरक्षा और विकास कार्यों को देखते हुए कोर्ट ने कोई भी राहत देने से मना कर दिया है।

