बॉम्बे हाई कोर्ट ने मशहूर अभिनेता शेखर सुमन और कॉमेडियन भारती सिंह के खिलाफ दर्ज 14 साल पुरानी FIR को रद्द कर दिया है। यह मामला 2010 में एक कॉमेडी शो के दौरान ‘या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!’ शब्द कहने पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में दर्ज हुआ था। कोर्ट ने साफ कहा कि मजाक में कहे गए इन शब्दों का मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला साल 2010 का है। सोनी टीवी के शो ‘कॉमेडी सर्कस का जादू’ के एक एपिसोड में भारती सिंह परफॉर्म कर रही थीं और शेखर सुमन जज थे। इस दौरान ‘या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!’ जैसे तुकबंदी वाले शब्दों का इस्तेमाल हुआ।
रजा एकेडमी के अध्यक्ष मोहम्मद इमरान दादानी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि इन शब्दों से मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं। इसके बाद दोनों कलाकारों के खिलाफ हेट-स्पीच की FIR दर्ज हुई थी।
हाई कोर्ट की दो टूक: ‘खाने की चीजों में धर्म कहाँ?’
जस्टिस अमित बोरकर ने सुनवाई के दौरान कहा कि रसगुल्ला और दही भल्ला आम खाने की चीजें हैं। इन्हें हर समुदाय के लोग खाते हैं। इन शब्दों का इस्तेमाल केवल कॉमेडी और तुकबंदी के लिए किया गया था। कोर्ट ने माना कि यह एक हल्का-फुल्का पारिवारिक शो था। इसमें किसी भी धर्म को निशाना बनाने की कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा (Malicious Intent) नहीं दिखी।
कलाकारों को बिना वजह परेशान न करें
कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि किसी कलाकार या जज के खिलाफ सिर्फ इसलिए केस नहीं चलाना चाहिए क्योंकि किसी को उसका मजाक पसंद नहीं आया। किसी भी बात को बिना संदर्भ (Context) के नहीं देखना चाहिए। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस मामले में कानूनी प्रक्रियाओं का सही पालन नहीं हुआ था। 14 साल तक चले इस कानूनी विवाद के खत्म होने से दोनों कलाकारों ने राहत की सांस ली है।

