‘उपदेश लिखने के लिए न करें AI का इस्तेमाल’: पोप लियो ने पादरियों को फटकारा, कहा- मशीनें कभी नहीं दे सकतीं ‘सच्ची आस्था’

दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप लियो XIV ने पादरियों को एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि चर्च में दिए जाने वाले उपदेश (सर्मन) तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI का सहारा बिल्कुल न लिया जाए।

19 फरवरी 2026 को रोम में पादरियों के साथ बातचीत करते हुए पोप ने जोर देकर कहा कि उपदेश लिखना केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि यह अपने विश्वास और जीवन के अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना है, जो कोई मशीन कभी नहीं कर सकती।

दिमाग के अभ्यास और आध्यात्मिक अनुशासन पर जोर

पोप लियो ने पादरियों को आगाह करते हुए कहा कि जैसे शरीर की मांसपेशियों का इस्तेमाल न करने पर वे कमजोर हो जाती हैं, वैसे ही बिना अभ्यास के दिमाग भी सुस्त पड़ जाता है। उन्होंने AI के जरिए उपदेश तैयार करने को एक ‘शॉर्टकट’ बताया।

पोप का मानना है कि यह शॉर्टकट पादरियों के आध्यात्मिक अनुशासन को खत्म कर सकता है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा उपदेश पादरी के अपने जीवन के संघर्षों और ईश्वर के प्रति उसकी निष्ठा से निकलता है, जबकि कंप्यूटर सिर्फ शब्दों को सजा सकता है, उन्हें महसूस नहीं कर सकता।

तकनीक अच्छी है, लेकिन उसकी एक सीमा हो

बैठक के दौरान पोप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नई तकनीक के दुश्मन नहीं हैं। उन्होंने बताया कि वेटिकन ने खुद एक ऐसी AI प्रणाली अपनाई है जो धार्मिक ग्रंथों का 60 भाषाओं में अनुवाद करती है ताकि चर्च का संदेश दुनिया के हर कोने तक पहुँचे। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि मशीन संदेश का अनुवाद तो कर सकती है, पर उस संदेश को बनाने और गहराई से समझाने की जिम्मेदारी केवल इंसान की होनी चाहिए।

सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ और ‘फॉलोअर्स’ से बचें

पोप ने पादरियों के बीच बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन लोकप्रियता या लाइक्स की संख्या को अपनी आध्यात्मिक सफलता का पैमाना न समझें। उनके मुताबिक, स्क्रीन पर दिखने वाली भीड़ अक्सर एक भ्रम होती है और असली सफलता वही है जब लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव आए।

बैठक में युवाओं के अकेलेपन और परिवारों के टूटने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पोप ने पादरियों को सलाह दी कि वे युवाओं की नकल करने या उनके जैसा दिखने की कोशिश करने के बजाय, अपने जीवन को एक सच्चे उदाहरण के रूप में पेश करें। उन्होंने चर्च को केवल नियमित आने वाले लोगों तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए समाज के हर वर्ग तक पहुँचने का सुझाव दिया।

पोप ने अपनी बात खत्म करते हुए फिर दोहराया कि पादरी अपने कर्तव्यों के लिए AI पर नहीं, बल्कि प्रार्थना और अपने विचारों पर भरोसा करें।