दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले आंदोलन और 20 जुलाई को संसद मार्च के बाद दर्ज मामलों को लेकर अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी FIR वापस नहीं ली जाएँगी। केवल वे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगे, जो सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज किए गए हैं।
दूसरी ओर महिला पत्रकारों से छेड़छाड़, मारपीट और अन्य आपराधिक आरोपों जैसी निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों में कानूनी कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी।
ये खबर इस बीच सामने आई है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार को मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि समझौते के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी दोबारा सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगी। वहीं बिहार और असम सरकार ने भी आंदोलन से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला लेते हुए सभी सरकारी कार्रवाई वापस लेने की घोषणा की है।
The Bihar government has announced that it will not take any punitive or retaliatory legal action against individuals involved in protests anywhere in Bihar prior to 6:00 PM on July 26.
— ANI (@ANI) July 27, 2026
It will also initiate the withdrawal of all FIRs, criminal complaints and show-cause notices… pic.twitter.com/CJ8oQcRcdA
सिर्फ सरकारी FIR होंगी वापस, निजी शिकायतों वाले मामलों में नहीं मिलेगी राहत
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आंदोलन के दौरान राजधानी में लगभग 20 FIR दर्ज की गई थीं। इनमें अधिकांश मामले प्रदर्शन, हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े हैं, जबकि करीब पाँच मामले निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज हुए। इन निजी मामलों में महिला पत्रकारों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट जैसे आरोप शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सरकार या पुलिस अपने स्तर पर मुकदमा वापस नहीं ले सकती क्योंकि शिकायतकर्ता निजी व्यक्ति हैं। इन मामलों में आरोपितों की पहचान, गिरफ्तारी और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में स्वयं पुलिस शिकायतकर्ता है, केवल उन्हीं में अभियोजन पक्ष अदालत से मुकदमा वापस लेने का अनुरोध करेगा। इसके लिए पहले उपराज्यपाल की मंजूरी ली जाएगी। मंजूरी मिलने के बाद संबंधित कोर्ट में अभियोजन आगे न चलाने का आवेदन दायर किया जाएगा।
अंतिम फैसला कोर्ट ही करेगी और उसकी अनुमति के बिना कोई भी मामला स्वतः समाप्त नहीं होगा। यदि किसी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं तो पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। गंभीर मामलों में हाई कोर्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत FIR निरस्त करने पर विचार कर सकता है।
वहीं बिना अनुमति प्रदर्शन, रास्ता जाम या धारा 163 के उल्लंघन जैसे अपेक्षाकृत छोटे मामलों का निस्तारण लोक अदालत के माध्यम से भी किया जा सकता है। इसके अलावा टॉलस्टॉय मार्ग और जंतर-मंतर पर दो सीसीटीवी कैमरे तोड़े जाने के मामले की अलग से जाँच जारी है।
CJP का अल्टीमेटम
CJP ने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर पर चला 36 दिवसीय धरना समाप्त होने से पहले सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी थी।
पार्टी का दावा है कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक ड्राफ्ट समझौता भी सौंपा गया था और भरोसा दिया गया था कि कानूनी सलाह के बाद मंगलवार तक लिखित समझौता साझा कर दिया जाएगा।
राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि यदि सरकार अपने वादे के अनुसार लिखित समझौता जारी नहीं करती और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया जाता तो पार्टी फिर से आंदोलन शुरू करेगी।
उन्होंने कहा कि संगठन अपने कार्यकर्ताओं और छात्रों को कानूनी मामलों से बचाने के लिए लगातार कानूनी सलाह ले रहा है। कपिल सिब्बल ने भी घोषणा की है कि जिन छात्रों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज होंगे, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की है।
बिहार सरकार का बड़ा ऐलान, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी
दिल्ली के घटनाक्रम के बीच बिहार सरकार ने भी आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि 26 जुलाई शाम छह बजे से पहले राज्य में हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही सरकार ने आंदोलन से जुड़े सभी सरकारी FIR, आपराधिक शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। ऐसे मामलों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाएगा और भविष्य में भी इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई सरकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
हालाँकि यह राहत केवल सरकारी स्तर पर दर्ज मामलों तक सीमित रहेगी, जबकि निजी शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों का निपटारा कानून के अनुसार कोर्ट और जाँच एजेंसियों की प्रक्रिया के तहत ही होगा।

