राजस्थान में एक निजी कंपनी द्वारा बनाए गए कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत और बीमार होने की खबरों के बाद राज्य की ड्रग कंट्रोलर व्यवस्था में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सस्पेंड ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा पर यह चौंकाने वाला आरोप है कि उन्होंने कुछ दवा कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए सरकारी दस्तावेजों में ‘नकली दवा’ की परिभाषा ही बदल दी थी।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राजाराम शर्मा ने ऐसी परिभाषाएँ जोड़ दी थीं जिनका मतलब था कि अगर किसी दवा में एक सक्रिय तत्व गायब है, तो भी उसे नकली या मिलावटी नहीं माना जाएगा, जबकि कानून के तहत सभी सक्रिय तत्वों का होना ज़रूरी है। राजाराम शर्मा की इस हेराफेरी का मकसद कथित तौर पर राज्य की 14 से 15 फार्मा कंपनियों को लाभ पहुँचाना था। सरकार ने राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया है और कफ सिरप सप्लाई करने वाली केसन फार्मा की सभी 19 दवाओं का वितरण रोक दिया है, जिसके नमूने पहले भी कई बार घटिया पाए गए थे।
इस मामले में केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक बेहद जरूरी एडवाइजरी (सलाह) जारी की है। केंद्र ने साफ तौर पर कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल नहीं दिया जाना चाहिए।
सरकार ने क्यों जारी की चेतावनी?
यह सलाह मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप पीने के बाद हुई बच्चों की मौत की खबरों के बाद आई है। इन दोनों राज्यों में अब तक 11 बच्चों की मौत हो चुकी है। अकेले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में यह संख्या 9 बताई जा रही है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों को आमतौर पर कफ सिरप देने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि बच्चों में खाँसी की बीमारी अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।
एडवाइजरी के मुख्य निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों से इस सलाह को सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल संस्थानों तक तुरंत पहुँचाने और लागू करने को कहा है। दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें।
Centre issues an advisory to all States and Union Territories on the rational use of cough syrups in the paediatric population.
— All India Radio News (@airnewsalerts) October 3, 2025
The Union Health Ministry (@MoHFW_INDIA) advises that Cough and cold medications should not be prescribed or dispensed to children below two years.… pic.twitter.com/M3FMLQBkZ2
बड़े लोगों को भी कफ सिरप केवल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लेना चाहिए। डॉक्टरों और दवा बेचने वालों को भी सतर्क रहने और सिर्फ प्रमाणित (ठीक से तैयार किए गए) कफ सिरप ही इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
जाँच और एहतियाती कदम
माना जा रहा था कि बच्चों ने ‘कोल्ड्रिफ’ नामक कफ सिरप का सेवन किया था, जिसे मौतों और किडनी फेल होने के मामलों से जोड़ा जा रहा था। हालाँकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जाँच में पाया कि मध्य प्रदेश में टेस्ट किए गए किसी भी कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) (जो किडनी को नुकसान पहुँचाते हैं) नहीं पाए गए हैं।
इसके बावजूद, DGHS ने पूरी सावधानी बरतते हुए यह सलाह जारी की है। साथ ही, सुरक्षा के तौर पर फिलहाल ‘कोल्ड्रिफ’ और ‘नेस्टो डीएस’ कफ सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

