‘चार हफ्तों में दें जवाब’: दिल्ली HC ने अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया समेत AAP नेताओं को भेजा नोटिस, जस्टिस स्वर्णकांता के खिलाफ कैंपेन चलाने पर फँसे

दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह समेत तमाम नेताओं को आपराधिक अवमानना का नोटिस भेजा है, जिन्होंने मीडिया पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ अभियान चलाया था। मंगलवार (19 मई 2026) को दिल्ली हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से ये फैसला सुनाया।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने अवमानना ​​के सभी आरोपितों से चार हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अखबारों में मौजूद खबरों को रिकॉर्ड के रूप में रखने को कहा है।

इससे पहले जस्टिस स्वर्णकांता ने अरविंद केजरीवाल समेत सभी आरोपित को अवमानना का नोटिस देने के बाद खुद को दिल्ली शराब नीति से जुड़े केस से अलग कर लिया। उनका कहना है कि ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए कि आरोपितों की डिमांड को देखते हुए वह केस छोड़ रही हैं, बल्कि उन्होंने अवमानना कार्यवाही शुरू की है इसलिए ये सही होगा कि इन मामलों की कार्यवाही दूसरी बेंच करे।

कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर न्यायपालिका और जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया।

इससे पहले जस्टिस शर्मा ने कहा, “वो मुझे डराना चाहते थे। उन्हें लगता था कि वो मेरे बारे में गलत बातें फैलाकर मुझे रोक सकते हैं। वो गलत थे। यह साइकोलॉजिकल दबाव था। किसी भी जज को जजमेंट या ऑर्डर की कोई भी आम आदमी आलोचना कर सकता है, यह अवमानना नहीं है, लेकिन फेयर क्रिटिसिज्म और कैंपेन चलाने में फर्क होता है।”

उन्होंने कहा, “मैं डरने वाली नहीं हूँ। कोर्ट केवल संविधान के सामने झुकती है, किसी राजनीतिक व्यक्ति के सामने नहीं।” कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल ने कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के बजाय सोशल मीडिया पर जज की छवि खराब करने की कोशिश की।