बुर्के की इजाजत, लेकिन तिलक-बिंदी-कलावे की मनाही… NHRC पहुँचा देहरादून के उत्तरांचल कॉलेज में हिंदू छात्रों के साथ भेदभाव का मामला, 2 हफ्ते में माँगी रिपोर्ट

उत्तराखंड के देहरादून स्थित उत्तरांचल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में हिंदू छात्रों के साथ धार्मिक भेदभाव के आरोपों का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुँच गया है। शिकायत में कहा गया है कि कॉलेज में छात्रों को बिंदी, तिलक और कलावा जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीक पहनने से रोका जाता है।

आरोप है कि ऐसा करने वाले छात्रों को अनुपस्थित (अबसेंट) मार्क किया जाता है, उनके धार्मिक प्रतीक जबरन हटाए जाते हैं और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनकी तस्वीरें भी ली जाती हैं। वहीं शिकायत में यह भी बताया गया है कि मुस्लिम छात्राओं को बुर्का पहनने की अनुमति दी जाती है।

यह शिकायत 2 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कॉलेज की यह व्यवस्था हिंदू छात्रों के साथ भेदभाव करती है और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। हिंदूफोबिया ट्रैकर के अनुसार, शिकायत में कहा गया कि यह सब कॉलेज की प्रिंसिपल अल्फोंसा मैथ्यू के निर्देश पर किया जा रहा है।

NHRC ने कई अधिकारियों को भेजा नोटिस

मामले को गंभीर मानते हुए NHRC ने मंगलवार (7 जुलाई 2026) को इसका संज्ञान लिया। आयोग ने UGC के चेयरमैन, उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, मेडिकल एजुकेशन विभाग के सचिव, उत्तरांचल PG कॉलेज के प्रिंसिपल, देहरादून के DM और SSP को नोटिस जारी किया है।

आयोग ने इन सभी अधिकारियों को मामले की जाँच कराने और दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) आयोग के सामने पेश करने का निर्देश दिया है।

शिकायतकर्ता ने क्या माँग की?

शिकायत में कहा गया है कि कॉलेज की कथित कार्रवाई संविधान में दिए गए समानता के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करती है।

शिकायतकर्ता ने NHRC से पूरे मामले की स्वतंत्र जाँच कराने, उत्तराखंड सरकार और कॉलेज प्रबंधन से रिपोर्ट तलब करने तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

इसके अलावा यह भी माँग की गई है कि शिकायत करने वाले या प्रभावित छात्रों को किसी तरह की प्रताड़ना या बदले की कार्रवाई से सुरक्षा दी जाए। साथ ही कॉलेज की नीतियों की जाँच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी छात्रों के लिए धार्मिक अभिव्यक्ति से जुड़े नियम पारदर्शी, भेदभावरहित और संविधान के अनुरूप हों।

फिलहाल NHRC ने मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब माँगा है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।