सरकारी स्कूलों में डिजिटल पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। साल 2025-26 के लिए समग्र शिक्षा कार्यक्रम के तहत सैकड़ों पुराने कंप्यूटर लैब को अपग्रेड करने और नए लैब बनाने की योजना बनाई गई है।
डिजिटल क्लासरूम पर फोकस
आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय के तहत 2025-26 के लिए प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने माध्यमिक स्कूलों में मौजूद 376 सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) लैब को अपग्रेड करने की मंजूरी दी है। यह कदम डिजिटल साधनों और बेहतर बुनियादी ढाँचे के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बड़ी योजना का हिस्सा है।
ज्यादा छात्रों वाले स्कूलों में नए लैब
पुरानी सुविधाओं को सुधारने के साथ-साथ सरकार 24 नए ICT लैब भी बनाएगी। ये लैब उन स्कूलों में लगाए जाएँगे जहाँ सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्तर पर 700 से ज्यादा छात्र हैं। ये मंजूरी 2025-26 के वार्षिक कार्य योजना और बजट (AWPB) से जुड़े सप्लीमेंट्री PAB मीटिंग में दी गई है।
इसके अलावा सात स्कूलों को एडवांस डिजिटल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (टाइप-1) सपोर्ट देने के लिए चुना गया है। अब कुल मिलाकर 31 स्कूलों में नई डिजिटल सुविधाएँ लागू की जा रही हैं।
जिला स्तर पर वितरण
इन लैब का वितरण अलग-अलग जिलों में किया गया है। नॉर्थ ईस्ट-II जिले को सबसे ज्यादा यानी सात नए ICT लैब मिले हैं। इसका उद्देश्य यह है कि हर क्षेत्र के छात्रों को आधुनिक पढ़ाई की सुविधाएँ समान रूप से मिल सकें।
ICT लैब क्यों जरूरी हैं
अधिकारियों का कहना है कि ICT लैब सिर्फ कंप्यूटर सीखने के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य विषयों को बेहतर समझने में भी मददगार होते हैं। इनसे छात्र वैश्विक शैक्षणिक सामग्री तक पहुँच बना सकते हैं, उनकी सोचने और समस्या हल करने की क्षमता भी बेहतर होती है।
ये लैब शिक्षकों के लिए पढ़ाना आसान बनाते हैं और स्कूल के प्रशासनिक काम को भी सुचारु करने में मदद करते हैं। कुल मिलाकर यह पहल छात्रों को भविष्य के करियर के लिए ज्यादा व्यावहारिक तरीके से तैयार करेगी।
कंप्यूटर लैब के लिए अलग बजट
इस योजना के अलावा दिल्ली सरकार ने 2025-26 के बजट में 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जिससे सरकारी स्कूलों में 175 नए कंप्यूटर लैब बनाए जाएँगे। ये लैब CBSE के मानकों के अनुसार तैयार किए जाएँगे, जिससे राजधानी में डिजिटल शिक्षा को और मजबूती मिलेगी।
इन सभी कदमों के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकारी स्कूलों के छात्र आधुनिक तकनीक से पढ़ाई करने में पीछे न रहें और उन्हें भी निजी स्कूलों जैसी सुविधाएँ मिलें। लक्ष्य यही है कि कक्षाओं को ज्यादा समावेशी, प्रभावी और भविष्य के लिए तैयार बनाया जाए।

