प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 6,000 करोड़ रुपए के महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने Ebix के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार किया है। दिल्ली में छापेमारी के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। अब उन्हें आगे की पूछताछ के लिए रायपुर ले जाया जा रहा है। इस मामले में अब तक 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जाँच एजेंसी ने विकास गर्ग को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। महादेव ऐप और दुबई के ‘स्काईएक्सचेंज’ ऐप से खूब अवैध कमाई की गई थी। इस काली कमाई को फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया गया था। जाँच में पता चला है कि इस पैसे का बड़ा हिस्सा विकास गर्ग की कंपनियों में भेजा गया था।
विकास गर्ग ने इस अवैध पैसे को शेयर बाजार की 3 कंपनियों में लगाया। इन कंपनियों के नाम विकास इकोटेक, विकास लाइफकेयर और इराया लाइफस्पेसेज हैं। गर्ग ने इसी काली कमाई से ‘एबिक्सकैश’ नाम की विदेशी मुद्रा कंपनी में 64 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी। बता दें कि विकास गर्ग BJP के Economic cell का संयोजक है।
संपत्तियों पर शिकंजा और दुबई से जुड़ा कनेक्शन
ED ने विकास गर्ग की चालाकी को पकड़कर सख्त कदम उठाया है। एजेंसी ने पिछले हफ्ते ही उनके परिवार की ₹940 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली थी। जाँचकर्ताओं का कहना है कि यह संपत्ति पूरी तरह सट्टेबाजी के पैसे से बनी थी। हालाँकि, कंपनी का कहना है कि उनके प्रमोटर्स ने कोई गलत काम नहीं किया है।
इस पूरे सट्टेबाजी के धंधे को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने शुरू किया था। ये दोनों साल 2019 में भारत छोड़कर दुबई भाग गए थे। वे वहीं से यह काला धंधा चला रहे थे। हाल ही में सौरभ को मस्कट में पकड़ा गया है और उसे भारत लाने की तैयारी चल रही है। वहीं, दूसरा आरोपित रवि उप्पल यूएई से लापता है।
कैसे चलता था खेल और आगे की कानूनी तैयारी
महादेव ऐप के जरिए पूरे देश में अवैध सट्टेबाजी का जाल बिछाया गया था। इस ऐप पर लोग पोकर, ताश, क्रिकेट, बैडमिंटन और फुटबॉल मैचों पर सट्टा लगाते थे। यहाँ तक कि चुनावों के नतीजों पर भी दाँव लगाया जाता था। ED ने साल 2022 में छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और बंगाल में दर्ज केस के आधार पर यह जाँच शुरू की थी।
इस मामले में अब तक अदालत में पाँच चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। इसमें 74 लोगों और कंपनियों को आरोपित बनाया गया है। ED के मुताबिक, इस ₹6000 करोड़ के घोटाले के तार कई बड़े नेताओं और सरकारी अफसरों से जुड़े हैं। अब विकास गर्ग से पूछताछ कर बाकी पैसों का पता लगाया जा रहा है।

