राज्य निर्वाचन विभाग के आँकड़ों को देखें तो इस पूरी प्रक्रिया का पता चलता है। एसआईआर से पहले कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 1.04 करोड़ ऐसे मामले थे, जिनका 2003 की सूची से मिलान नहीं हो पाया था। ऐसे मामलों में दस्तावेज मँगा कर उसका निपटारा किया गया।
दावे-आपत्तियों के तहत करीब 86.69 लाख लोगों ने नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरा, जबकि 3.18 लाख लोगों ने नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किया। अब 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि इस प्रक्रिया के बाद सूची और अधिक सटीक व पारदर्शी होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ कह दिया है कि बिना उचित प्रक्रिया और सुनवाई के किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं काटा जाएगा।

