कलकत्ता हाई कोर्ट ने निलंबित तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक हुमायूं कबीर को Z+ श्रेणी की सुरक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से संपर्क करने की अनुमति दे दी है। हालाँकि कोर्ट ने साफ किया है कि अगर केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल उपलब्ध कराती है, तो उसका पूरा खर्च खुद हुमायूं कबीर को ही उठाना होगा।
यह आदेश जस्टिस सुव्रता घोष की एकल पीठ ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए दिया। हाई कोर्ट ने सीधे तौर पर Z या Z+ सुरक्षा देने का आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए हुमायूं कबीर को दो सप्ताह के भीतर केंद्रीय गृह मंत्रालय में आवेदन करने की छूट दी।
कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह कानून के तहत उनके अनुरोध पर विचार करे। जस्टिस सुव्रता घोष ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सुरक्षा देने का निर्देश नहीं है, बल्कि केवल आवेदन करने की अनुमति है।
राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं, केंद्रीय बलों की माँग
भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनकी जान और संपत्ति को गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक पार्टी जनत उन्नयन पार्टी (JUP) बनाने के बाद से उन्हें लगातार धमकी भरे फोन कॉल मिल रहे हैं।
कबीर ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस की सुरक्षा पर भरोसा नहीं है, क्योंकि पुलिस राज्य की ममता बनर्जी सरकार के अधीन काम करती है। ऐसे में केवल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
बेलडांगा हिंसा और बढ़ता राजनीतिक तनाव
हुमायूं कबीर ने अपनी याचिका में हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि 16 जनवरी 2026 को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हिंसा के बाद जब वे स्थिति का जायजा लेने पहुँचे, तो स्थानीय लोगों की तीखी प्रतिक्रिया के कारण उन्हें वहाँ से लौटना पड़ा।
यह हिंसा झारखंड में मारे गए प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख की हत्या के विरोध में हुई थी, जिसमें रेल ट्रैक और नेशनल हाईवे-12 जाम कर दिए गए थे। इससे पहले कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में उनके दौरे के दौरान भी सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिससे अपनी सुरक्षा को लेकर विधायक की चिंताएँ और बढ़ गईं थी।

