भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विलेन खुद ट्रंप-वेंस और नवारो, साथियों के विरोध के बाद भी लगाया टैरिफ: लीक ऑडियो- लाठी के दम पर दुनिया हाँक रहा US

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता अब सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रही है। अमेरिका की सत्ता और राजनीति के भीतर इस डील को लेकर गहरी खींचतान सामने आ गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुद ट्रंप प्रशासन के कुछ शीर्ष चेहरे इस समझौते की राह में बाधा बने हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच महीनों से चल रही बातचीत अटकी हुई है।

व्हाइट हाउस के भीतर विरोध और टेड क्रूज की नाराजगी

अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सांसद टेड क्रूज की एक कथित लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है। इसमें क्रूज अपने दानदाताओं से बातचीत में कहते सुने गए कि वह भारत के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए व्हाइट हाउस से लड़ रहे हैं।

रिकॉर्डिंग में उन्होंने व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार पीटर नवारो, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई मौकों पर खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस डील में रुकावट डालने वाला बताया। क्रूज के मुताबिक, सार्वजनिक तौर पर भारत-अमेरिका रिश्तों पर सकारात्मक बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन अंदरूनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग हैं।

टैरिफ नीति पर ट्रंप से टकराव

रिपोर्ट के अनुसार, क्रूज ने ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि हई टैरिफ से अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है और लोगों की रिटायरमेंट सेविंग्स पर असर पड़ सकता है।

कहा जा रहा है कि अप्रैल 2025 में नए टैरिफ लागू होने के बाद क्रूज और कई रिपब्लिकन सीनेटरों ने देर रात तक ट्रंप से बातचीत कर उन्हें फैसला बदलने की कोशिश की, लेकिन यह चर्चा बेहद तीखी रही। क्रूज का दावा है कि अगर 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले आर्थिक हालात बिगड़े, तो रिपब्लिकन पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

रिपब्लिकन पार्टी में दरार और भारत की अहमियत

इस पूरे घटनाक्रम ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेदों को उजागर कर दिया है। टेड क्रूज लंबे समय से भारत-अमेरिका रिश्तों के समर्थक रहे हैं। उन्होंने भारत को अमेरिका का ‘स्वाभाविक सहयोगी’ बताते हुए लोकतंत्र, मुक्त बाजार और चीन की चुनौती के खिलाफ साझेदारी पर जोर दिया है।

टेक्सास में बड़ी भारतीय-अमेरिकी आबादी भी इस रिश्ते को राजनीतिक रूप से अहम बनाती है। इन हालात से साफ है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब सिर्फ दो देशों का आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीति के भीतर एक बड़ा विवाद बन चुका है, जिसका असर आने वाले चुनावों और द्विपक्षीय रिश्तों पर भी पड़ सकता है।