पाकिस्तान के ISI हैंडलर्स ने 75 भारतीय सैनिकों को व्हाट्सऐप पर किया संपर्क: दिल्ली से गिरफ्तार नेपाली नागरिक कर रहा था तस्करी

पाकिस्तान के हैंडलर्स ने भारत के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर जम्मू-कश्मीर और मथुरा के 75 सैनिकों तक पहुँच बनाई थी। इन नंबरों से वह सैनिकों से व्हाट्सऐप पर संपर्क करते थे। खुफिया जाँच एजेंसियों ने यह जानकारी 16 सिम कार्ड से खंगाले गए डाटा से निकाली है।

ये वही सिम कार्ड हैं, जिन्हें नेपाल के बिरगुंज के रहने वाले प्रभात कुमार चौरसिया से बरामद किए गए थे। वह भारत के सिम कार्ड की तस्करी करता था। जाँच एजेंसियों ने उसे दिल्ली के लक्ष्मी नगर से संदिग्ध राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के आरोप में 28 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया था।

जाँच एजेंसियों ने बताया कि सिम कार्ड में मिले 75 सैनिकों के नंबर और अन्य विवरण से उन्हें चिन्हित किया जाएगा और उनकी यूनिट को सूचना दी जाएगी। इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। एजेंसी ने बताया कि फिलहाल सैनिकों के जासूसी गतिविधि में शामिल होने के कोई भी ठोस सबूत नहीं हैं।

ISI हैंडर्लस भारत की जासूसी के लिए करते सिम का इस्तेमाल

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच में सामने आया कि नेपाल के प्रभात कुमार चौरसिया ने अपने आधार कार्ड पर बिहार और महाराष्ट्र से सिम कार्ड को खरीदे थे। इनमें से ज्यादातर सिम कार्ड महाराष्ट्र के लातूर जिले में पंजीकृत हैं।

इन सिम कार्ड की भारत से काठमांडू में तस्करी कर ले जाया जाता था, जहाँ से इन्हें ISI के हैंडलर्स को दे दिया जाता था। ये हैंडलर्स इन सिम का इस्तेमाल जासूसी के लिए करते थे। व्हाट्सऐप के जरिए भारतीय सेना के जवानों, अर्धसैनिक बलों और सरकार विभागों के कर्मियों तक पहुँच बनाई जाती थी।

चौरसिया को सेना और DRDO की जानकारी इकट्ठा करने का सौंपा गया था काम

अगस्त 2025 में नेपाली प्रभात कुमार चौरसिया को दिल्ली से गिरफ्तार करने के बाद DCP (स्पेशल सेल) अमित कौशिल ने बताया था कि उससे मिले 16 सिम कार्ड्स में से 11 का इस्तेमाल ISI हैंडलर्स लाहौर, बहावलपुर और पाकिस्तान में अलग-अलग जगहों से रहे थे।

जाँच में यह भी सामने आया कि चौरसिया साल 2024 में ही किसी अन्य नेपाली के जरिए ISI हैंडलर्स के संपर्क में आया था। उसे अमेरिकी वीजा और विदेश में पत्रकारिता का अवसर दिलाने का झाँसा दिया गया था। इसके बदले में उसे भारतीय सिम कार्ड मुहैया कराने और DRDO और सेना के प्रतिष्ठानों की जानकारी इकट्ठा करने का काम सौंपा गया था।