केरल में एक फर्स्ट ईयर के डेंटल छात्र की आत्महत्या ने कैंपस में जातिवाद और बुलिंग के आरोपों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 22 वर्षीय डेंटल छात्र नितिन राज आरएल ने कथित तौर पर 10 अप्रैल को अंजरक्कंडी डेंटल कॉलेज की 5वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बाद में कन्नूर मेडिकल कॉलेज में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
नितिन राज के परिवार और साथी छात्रों ने कैंपस में जाति आधारित अपमान और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। खासतौर पर उस घटना को लेकर, जब एक लोन रिकवरी एजेंट की धमकी भरी कॉल्स आने के बाद नितिन राज को प्रिंसिपल के दफ्तर बुलाया गया था। दरअसल, नितिन राज ने दिसंबर में ₹14,000 का लोन लिया था और लता ससिधरन नाम की एक टीचर को जिनका नाम नितिन की माँ के नाम से मिलता-जुलता था, धमकी भरे फोन आने लगे थे।
कॉलेज ने जाति आधारित उत्पीड़न के आरोपों के बाद दो शिक्षकों ओरल पैथोलॉजी विभाग के HOD डॉ. एमके राम और संगीता नांबियार को निलंबित कर दिया है। दोनों शिक्षकों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
नितिन के पिता राजन की शिकायत पर मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट) की धाराएँ जोड़ी गई हैं। परिवार का कहना है कि नितिन जैसा होनहार छात्र महज ₹14,000 के लोन रिकवरी के कारण कभी आत्महत्या नहीं करता।
परिवार का आरोप है कि नितिन को प्रिंसिपल के दफ्तर में अन्य शिक्षकों की मौजूदगी में अपमानित किया गया, उनका फोन छीन लिया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और यह सब उनकी मौत से ठीक पहले हुआ।
साथी छात्रों ने डॉ. राम पर उत्पीड़न, बुलिंग और व्यक्तिगत अपमानजनक टिप्पणियों के गंभीर आरोप लगाए हैं जबकि राम खुद को निर्दोष बता रहे हैं। राम पर आरोप है कि वे गरीब तबके के छात्रों को निशाना बनाते थे और उन्हें लगातार ‘स्लमडॉग’ जैसे अपमानजनक शब्दों से बुलाते थे। कुछ छात्राओं ने भी बताया कि वे क्लास में उनके शरीर को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ करते थे।
फ्रंटलाइन के अनुसार, एक छात्र ने बताया कि नितिन को काफी ‘बुली’ किया जा रहा था और एक वक्त पर उन्होंने डॉ. राम को जवाब देना शुरू कर दिया जिससे वे हैरान रह गए। दूसरी आरोपित शिक्षिका संगीता नांबियार के बारे में छात्रों ने कहा कि उनकी ओर से ‘बुलिंग’ या जातिगत अपमान का कोई पुराना उदाहरण नहीं है क्योंकि वे डॉ. राम से जूनियर हैं।
नितिन के अपने सहपाठियों और परिवार को भेजे गए कुछ ऑडियो संदेश वायरल हो गए हैं। इनमें वे कह रहे हैं कि डॉ. राम ने उनके नंबर काटने की धमकी दी, उनका मजाक उड़ाया और उनकी गलतियाँ दिखाने के लिए उनकी आंसर शीट क्लास में सबके सामने दिखाई। साथ ही, उनकी माँ के बारे में भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिस जाँच में लोन ऐप का पहलू भी खंगाला जा रहा है और InstaPay लोन ऐप के तीन ऑपरेटरों को 18 अप्रैल को नोएडा से गिरफ्तार किया गया है।
अदालत में डॉ. राम ने दावा किया है कि वे खुद दलित हैं और इसलिए SC/ST एक्ट उन पर लागू नहीं होना चाहिए। राम का कहना है कि वे बजंद्री समुदाय से हैं जो उनके अनुसार अनुसूचित जाति के अंतर्गत आता है।
हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने इस दावे का विरोध किया है। उन्होंने अदालत में दस्तावेज पेश किए जिनमें दिखाया गया कि डॉ. राम OBC वर्ग से हैं ना कि SC से। अदालत ने यह तर्क स्वीकार कर लिया है और अगली सुनवाई में फैसला सुनाया जाएगा। राम यह भी दावा कर रहे हैं कि नितिन की आत्महत्या प्रिंसिपल के दफ्तर में हुई परिस्थितियों की वजह से हुई और उनका इससे कोई संबंध नहीं है।
हालाँकि, अभियोजन पक्ष ने CCTV फुटेज पेश की है जिसमें राम प्रिंसिपल के कमरे में मौजूद दिखते हैं और सब कुछ सुनते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सबूत भी सामने आए हैं जो यह संकेत देते हैं कि राम ने शिक्षिका लता ससिधरन को लोन ऐप मामले में नितिन के खिलाफ प्रिंसिपल से शिकायत करने के लिए प्रेरित किया होगा।
इस बीच, केरल के नेताओं ने इस मामले को कॉलेज कैंपस में दलितों के खिलाफ ‘बढ़ते अत्याचार और भेदभाव’ से जोड़ना शुरू कर दिया है और UGC दिशा-निर्देशों को लागू करने की माँग की है। मामले में जाति के पहलू को राजनीतिक और सोशल मीडिया पर जिस तरह उठाया जा रहा है उससे यह कहानी फैलाने की कोशिश की जा रही है कि यह एक ‘उच्च जाति’ द्वारा निम्न जाति के छात्र पर किए गए अत्याचार का मामला है।

