राज्यसभा के बाद लोकसभा से पास हुआ वंदे मातरम् संरक्षण बिल, जानें- अब राष्ट्रीय गीत के अपमान पर क्या मिलेगा दंड?

देश का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में आ गया है। संसद ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से पास होने के बाद 30 जुलाई को लोकसभा ने भी इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। अब यह बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह पूरे देश में कानून बन जाएगा।

इस नए कानून के तहत वंदे मातरम् का जानबूझकर अपमान करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके गायन में बाधा डालने वाले को 3 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति दोबारा यही गलती करता है, तो उसे कम से कम एक साल की जेल जरूर होगी। हालाँकि, यह सजा सिर्फ जानबूझकर किए गए अपमान पर ही लागू होगी।

अब वंदे मातरम् को भी मिलेगा राष्ट्रगान जैसी कानूनी सुरक्षा

अभी तक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत केवल तिरंगा, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन को कानूनी सुरक्षा मिली हुई थी। लेकिन इस संशोधन के बाद वंदे मातरम् को भी इसी कानून के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा।

यानी अब राष्ट्रीय गीत का अपमान करना भी उतना ही गंभीर अपराध माना जाएगा, जितना राष्ट्रगान या तिरंगे का अपमान।

किन मामलों में होगी कार्रवाई?

नए कानून में साफ किया गया है कि कार्रवाई केवल उन्हीं लोगों पर होगी जो जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करेंगे। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम् का मजाक उड़ाता है, इसके गायन को रोकता है या कार्यक्रम में जानबूझकर व्यवधान पैदा करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा। वहीं अनजाने में हुई गलती या भूल को अपराध नहीं माना जाएगा।

इस संशोधन के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है। वहीं यदि कोई व्यक्ति पहले भी ऐसे अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है और दोबारा वही गलती करता है, तो उसके लिए कम से कम एक साल की जेल की सजा अनिवार्य होगी।

सरकार ने क्यों लाया यह बिल?

केंद्र सरकार का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। इस वर्ष इस गीत की 150वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है।

सरकार का मानना है कि जिस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान करोड़ों लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई, उसे भी वही कानूनी सम्मान मिलना चाहिए जो राष्ट्रगान और तिरंगे को प्राप्त है।

पहले भी गृह मंत्रालय ने जारी किए थे निर्देश

यह बिल अचानक नहीं आया है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश जारी किए थे कि जहाँ किसी सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों गाए जाएँ, वहाँ सबसे पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन गण मन गाया जाए। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय गीत के सभी छह अंतरे गाए जाएँ। अब इन्हीं निर्देशों को कानूनी आधार देने के लिए यह संशोधन लाया गया है।

लोकसभा में यह बिल ऐसे समय पास हुआ जब विपक्ष लगातार नीट पेपर लीक मामले में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेर रहा था। विपक्षी सदस्यों के विरोध और हंगामे के बीच सदन में ध्वनिमत से बिल पारित कर दिया गया। इससे पहले राज्यसभा में भी इस बिल पर तीखी बहस हुई थी और कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया था।

क्या है इस बिल की पूरी जानकारी?

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन करना है। इस कानून के लागू होने के बाद वंदे मातरम् भी उन राष्ट्रीय प्रतीकों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनका अपमान करना दंडनीय अपराध होगा।

यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालता है या उसका उपहास करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। दोषी को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।

दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की जेल अनिवार्य होगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को कानूनी संरक्षण देना है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन पूरे देश में लागू हो जाएगा और वंदे मातरम् को पहली बार राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो जाएगी।