लोकसभा में NDA को मजबूती, स्पीकर ने शिवसेना-UBT के 6 MPs का शिंदे गुट में विलय किया मंजूर: TMC के 20 बागी सांसदों को अलग बैठने की अनुमति

मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले लोकसभा में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी है।

इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस के 20 बागी सांसदों को भी सदन में अलग बैठने की अनुमति मिल गई है। इन फैसलों को संसद के मानसून सत्र और आने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों का विलय मंजूर

लोकसभा सचिवालय ने आधिकारिक सूचना जारी कर बताया कि शिवसेना (UBT) के छह सांसदों का दल बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय मान लिया गया है। इसके बाद 18वीं लोकसभा में पार्टी की नई स्थिति भी अपडेट कर दी गई है।

इस फैसले से शिंदे गुट की लोकसभा में ताकत बढ़कर 13 सांसद हो गई है, जिससे भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को भी मजबूती मिली है।

TMC के 20 बागी सांसदों को अलग बैठने की अनुमति

लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की मंजूरी भी दे दी है। इन सांसदों का नेतृत्व वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे हैं। बागी सांसदों ने खुद को नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय करने की माँग की है।

हालाँकि अभी केवल अलग बैठने की अनुमति दी गई है। NCPI के बैनर तले इनके विलय को आधिकारिक मान्यता देने पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा।

किरेन रिजिजू ने बागी नेताओं को भेजा न्योता

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने TMC के बागी नेताओं को सरकार की सर्वदलीय फ्लोर लीडर्स की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भी भेजा है। इसे मानसून सत्र शुरू होने से पहले संभावित नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

ये सभी घटनाक्रम संसद के मानसून सत्र से ठीक दो दिन पहले सामने आए हैं। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जिसमें सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने और पारित कराने की तैयारी में है।

NDA की संख्या बढ़ने से अहम विधेयकों को मिल सकता है फायदा

शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और TMC के बागी सांसदों द्वारा NDA को समर्थन देने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

ऐसी अटकलें हैं कि अब सरकार परिसीमन (Delimitation) विधेयक और महिलाओं के आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। इन दोनों विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसी बहुमत की कमी के कारण अप्रैल में यह संशोधन पारित नहीं हो पाया था।

NCP (शरद पवार) और DMK के समर्थन की भी चर्चा

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और DMK का समर्थन मिल सकता है।

अगर ऐसा होता है तो सरकार के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाना पहले की तुलना में आसान हो सकता है।

DMK ने भी माँगी अलग बैठने की व्यवस्था

इस बीच DMK ने भी लोकसभा में कॉन्ग्रेस से अलग बैठने की माँग की है। यह माँग इसलिए की गई क्योंकि तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस ने DMK से गठबंधन तोड़कर TVK का समर्थन किया है।

हालाँकि लोकसभा अध्यक्ष ने अभी इस माँग पर अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसे भी मंजूरी मिल सकती है।

TMC और शिवसेना (UBT) ने उठाई अयोग्यता की माँग

तृणमूल कॉन्ग्रेस और शिवसेना (UBT) दोनों ने अपने बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की माँग की है। हालाँकि फिलहाल ऐसी संभावना कम मानी जा रही है।

माना जा रहा है कि बागी सांसदों की संख्या दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का उल्लंघन नहीं करती, इसलिए स्पीकर उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई करने की संभावना कम है।

क्यों है यह घटनाक्रम अहम?

मानसून सत्र से पहले हुए इन राजनीतिक बदलावों ने लोकसभा का गणित बदल दिया है। शिंदे गुट की ताकत बढ़ने, TMC के बागी सांसदों के अलग होने और NDA को संभावित समर्थन मिलने से सरकार की स्थिति पहले से मजबूत हुई है।

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि स्पीकर TMC और DMK से जुड़े लंबित फैसलों पर क्या रुख अपनाते हैं और सरकार अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराने में कितनी सफल रहती है।