कांसमंडी किले पर नहीं होगी बकरीद की नमाज, प्रशासन ने किया साफ इनकार: तनाव के बीच लखनऊ में चप्पे-चप्पे पर PAC तैनात, सुंदरकांड पाठ से भी रोका

लखनऊ के मलिहाबाद (कसमंडी कला) में किला-मस्जिद विवाद बहुत बढ़ गया है। इलाके में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विवादित स्थल पर बकरीद की नमाज पर रोक लगा दी गई है।

इसके साथ ही वहाँ सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ पर भी पाबंदी रहेगी। किसी को भी माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है।

सुंदरकांड पढ़ने पहुँचे लोगों को पुलिस ने रोका

पासी समाज और हिंदू महासभा ने मंगलवार (26 मई 2026) को विवादित जगह पर सुंदरकांड पढ़ने का ऐलान किया था। पुलिस ने तनाव रोकने के लिए सूरज पासी और योगेश पासी समेत कई नेताओं को पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया।

हिंदू महासभा के नेता शिशिर चतुर्वेदी जब कार्यकर्ताओं के साथ पहुँचे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद वे लोग पूजा की थाल लेकर वहीं बैठ गए। उन्होंने वहाँ सांकेतिक रूप से धूपबत्ती जलाई और आरती की।

आखिर क्या है दोनों पक्षों का दावा?

मुस्लिम पक्ष इस जगह को पुरानी मस्जिद, मकबरा और कब्रिस्तान बता रहा है। पासी समाज का कहना है कि यह 11वीं सदी (साल 980 से 1031) के नागवंशी राजा कंस पासी का किला और शिव मंदिर था। उनका दावा है कि इमारत की दीवारों पर बने फन उनके नागवंश के प्रतीक हैं। उन्होंने अपनी बात के लिए पुराने गजेटियर का हवाला दिया है।

इस विवाद के बीच पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ के 15 सदस्यों पर केस दर्ज किया है। इससे पासी समाज काफी नाराज है। लाखन आर्मी के प्रमुख सूरज पासी ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर मुकदमे वापस नहीं हुए, तो पूरे यूपी में आंदोलन होगा। वे इस स्थल को सरकारी तौर पर संरक्षित घोषित करने की माँग कर रहे हैं।

ड्रोन और CCTV कैमरों से कड़ी निगरानी

कसमंडी इलाके में शांति बनाए रखने के लिए ड्रोन और CCTV कैमरों से नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को रोकने के लिए साइबर टीम भी एक्टिव है। अधिकारियों ने कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। वे दोनों पक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं की जाँच के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।