लखनऊ NIA कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण केस में छांगुर पीर पर कसा शिकंजा, खारिज की डिस्चार्ज याचिका: देशद्रोह-धोखाधड़ी जैसे केस रहेंगे जारी

लखनऊ की विशेष NIA कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण से जुड़े एक बेहद चर्चित और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपित जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर समेत अन्य आरोपितों की डिस्चार्ज एप्लीकेशन खारिज कर दी है।

कोर्ट नंबर-3 की विशेष जज नीतू पाठक ने करीब छह घंटे चली लंबी बहस के बाद प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए सभी आरोपितों पर देशद्रोह, धोखाधड़ी, सामूहिक दुष्कर्म समेत कई संगीन धाराओं में आरोप तय कर दिए। इसके साथ ही अब यह मामला ट्रायल के चरण में प्रवेश कर चुका है, जहाँ गवाहों और सबूतों के आधार पर आगे सुनवाई होगी।

देशविरोधी साजिश और धर्मांतरण का संगठित नेटवर्क

अभियोजन पक्ष के अनुसार, जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर इस पूरे नेटवर्क का सरगना है, जिसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर देश की डेमोग्राफी बदलने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश रची थी। आरोप है कि इस गिरोह ने भारत सरकार के खिलाफ षड्यंत्र करते हुए शरिया कानून लागू कर एक इस्लामिक राष्ट्र स्थापित करने की योजना बनाई।

इसी आधार पर आरोपितों पर IPC की धारा 121A (राष्ट्र के खिलाफ युद्ध की साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने, देवी-देवताओं का अपमान करने और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने के आरोप में IPC की धारा 153A के तहत भी केस बनाया गया है।

प्रेम जाल, फर्जी पहचान और संपत्ति में धोखाधड़ी

जाँच में सामने आया कि गिरोह गैर-मुस्लिम महिलाओं को फर्जी हिंदू नामों के जरिए प्रेम जाल में फँसाता था और फिर धोखे से उनका धर्मांतरण कराया जाता था। यह पूरा काम एक संगठित नेटवर्क के रूप में चलाया जा रहा था।

इसके अलावा मुख्य आरोपित छांगुर पीर और उसकी सहयोगी नसरीन पर आरोप है कि उन्होंने धर्म बदलने के बावजूद आधिकारिक दस्तावेजों में अपने नाम नहीं बदले और हिंदू पहचान का इस्तेमाल करते हुए जमीनों की खरीद-फरोख्त की। इस आधार पर IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया है।

दुष्कर्म, SC/ST एक्ट और विदेशी फंडिंग का खुलासा

मामले को और गंभीर बनाते हुए आरोपितों पर एक अनुसूचित जाति की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म (IPC 376D) का भी आरोप तय किया गया है। इसके साथ ही SC/ST एक्ट की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं, जिससे अपराध की गंभीरता और बढ़ जाती है।

यूपी ATS ने इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था और मुख्य आरोपित को बलरामपुर से गिरफ्तार किया गया था। जाँच के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया कि इस नेटवर्क को खाड़ी देशों से 100 करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी फंडिंग मिली थी, जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जा रहा था।

कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमे की विधिवत सुनवाई शुरू होगी, जिसमें पेश किए जाने वाले सबूत और गवाह इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा और अंतिम परिणाम तय करेंगे।

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