मुंबई में तरबूज खाने से नहीं गई थी 4 लोगों की जान, अंदर चूहे मारने वाला जहर था: 11 दिन में 54 टेस्ट करने के बाद आई FSL रिपोर्ट

मुंबई के पाइधोनी में एक ही परिवार के 4 लोगों की रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझ गई है। कलिना फॉरेंसिक लैब (FSL) की रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि उनके द्वारा खाए गए तरबूज में ‘जिंक फॉस्फाइड’ (चूहे मारने वाला जहर) मौजूद था। इसी जहर के कारण पूरे परिवार की जान गई।

तरबूज के अंदर मिला काल

फॉरेंसिक लैब (FSL) ने 11 दिनों तक चली लंबी जाँच और 54 अलग-अलग टेस्ट के बाद यह रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहर तरबूज के ऊपरी हिस्से पर नहीं, बल्कि उसके अंदर था। परिवार के सदस्यों के लीवर, किडनी और पेट के सैंपल्स (विसरा) में भी यही जहर पाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घर के बाकी खाने (चिकन पुलाव) में कोई जहर नहीं मिला।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कोई ‘जिंक फॉस्फाइड’ खाता है, तो शरीर के अंदर ‘फॉस्फीन गैस’ बनने लगती है। यह गैस सीधे फेफड़ों पर हमला करती है और शरीर में ऑक्सीजन का लेवल तेजी से गिरा देती है। यही वजह है कि 12 साल की छोटी बच्ची जैनब की मौत सबसे पहले हुई। डॉक्टर बताते हैं कि गैस बनने के बाद मौत लगभग निश्चित हो जाती है।

साजिश या हादसा? पुलिस की उलझन

जेजे मार्ग पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि जहर तरबूज के अंदर पहुँचा कैसे। फॉरेंसिक अधिकारियों का मानना है कि इसे इंजेक्शन से अंदर डालना मुश्किल है। पुलिस अब तीन एंगल पर काम कर रही है।

पहला, क्या दुकानदार के स्तर पर कोई लापरवाही हुई?। दूसरा, क्या किसी ने जानबूझकर तरबूज में जहर मिलाया?। तीसरा, या फिर यह किसी तरह का कीटनाशक हादसा है?। पुलिस को घर के अंदर से चूहे मारने की कोई दवा नहीं मिली है।

उस काली रात की कहानी

26 अप्रैल (रविवार) की रात करीब 1:30 बजे अब्दुल्ला दोकाडिया (44), उनकी पत्नी नसरीन (35) और दोनों बेटियों आयशा (16) व जैनब (12) ने तरबूज खाया था। उससे पहले उन्होंने रिश्तेदारों के साथ डिनर किया था। तरबूज खाने के कुछ घंटों बाद ही सबको उल्टियाँ और बेचैनी होने लगी। अस्पताल ले जाने के दौरान एक-एक कर सबने दम तोड़ दिया। अब्दुल्ला की अंधेरी में मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान थी।

देरी बनी जानलेवा

डॉक्टरों के अनुसार, परिवार ने तरबूज खाने के 4-5 घंटे बाद अस्पताल का रुख किया। अगर वे एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुँच जाते, तो ‘स्टमक वॉश’ के जरिए उनकी जान बचाई जा सकती थी। चूँकि जहर की मात्रा कम थी, इसलिए लक्षण दिखने में समय लगा, लेकिन तब तक जहर पूरे सिस्टम में फैल चुका था। आर्थिक तंगी की बातों को पुलिस ने पहले ही बेबुनियाद बताया है।