बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गाँव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है। घटना के सात दिन बाद मृतक की माँ की शिकायत पर शाहपुर थाना में हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस FIR में आरा के तत्कालीन SDPO, शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है।
मामले को लेकर बिहार में लगातार बहस जारी है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भरत तिवारी के परिवार ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार सामूहिक आत्मदाह करने के लिए मजबूर होगा। इस बीच मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है।
वकील नरेंद्र मिश्रा और वकील विशाल तिवारी की ओर से अलग-अलग याचिकाएँ दायर कर जाँच की माँग की गई है। एक लेटर पिटीशन के माध्यम से शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है कि मामले की निगरानी में स्वतंत्र जाँच कराई जाए और एनकाउंटर के दौरान मौजूद अधिकारियों की भूमिका की जाँच हो। बिहार सरकार से जवाब भी माँगे जाने की माँग की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि भरत तिवारी के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और परिजनों के साथ की गई कार्रवाई कानून सम्मत नहीं थी। दूसरी ओर पुलिस ने मृतक के परिवार और गाँव के कुछ लोगों पर सरकारी कार्य में बाधा, सड़क जाम, पथराव और अन्य आरोपों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

