न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को साफ कर दिया कि उनका देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल नहीं होगा। यह बोर्ड गाज़ा में शांति लाने और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में मदद के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसके असली मकसद को लेकर कई देशों में संदेह है।
न्यूजीलैंड सरकार का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह बोर्ड किस तरह काम करेगा, इसकी भूमिका क्या होगी और भविष्य में इसका दायरा कितना बड़ा होगा। साथ ही, बोर्ड के मसौदा नियमों में गाजा युद्ध का स्पष्ट जिक्र भी नहीं है, जिससे भ्रम और बढ़ गया है।
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा कि कोई भी नई अंतरराष्ट्रीय संस्था संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए और उसे यूएन की जगह लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन जैसे कई पश्चिमी देशों ने भी इस बोर्ड से दूरी बना ली है। हालाँकि, तुर्की, सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान और UAE जैसे कुछ देशों ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है।

