नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को भड़की हिंसा की जाँच अब विदेशी फंडिंग, हवाला नेटवर्क और कई संगठनों के कनेक्शन तक पहुँच गई है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस का दावा है कि इस मामले के मुख्य आरोपित और मजदूर बिगुल दस्ता के सदस्य सत्यम वर्मा के निजी बैंक खाते में विदेशों से करीब एक करोड़ रुपए भेजे गए थे।
यह रकम डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी विदेशी मुद्राओं में अलग-अलग देशों से आई थी। जाँच एजेंसियों को शक है कि इस पैसे का इस्तेमाल आंदोलन को संगठित करने, भीड़ जुटाने और हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सत्यम वर्मा और आकृति चौहान पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की है।
विदेशी फंडिंग और बैंक खातों की जाँच तेज
गौतमबुद्ध नगर पुलिस के एडिशनल कमिश्नर डॉ राजीव नारायण मिश्र के मुताबिक, जाँच के दौरान सत्यम वर्मा के बैंक खातों में कई बड़े विदेशी ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि अलग-अलग देशों से आई रकम को सत्यम ने अपने अन्य निजी खातों में भी ट्रांसफर किया था।
अब बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जाँच की जा रही है। अधिकारियों को शक है कि इस फंडिंग के पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि सत्यम वर्मा कई संगठनों से जुड़ा हुआ था। जाच एजेंसियाँ अब इन संगठनों की गतिविधियों, फंडिंग स्रोतों और इनके संपर्कों की छानबीन कर रही हैं।
पुलिस जाँच कर रही है कि विदेश से भेजी गई रकम का संबंध किन लोगों या संस्थाओं से जुड़ा हुआ है। मामले में हवाला कनेक्शन की भी जाँच चल रही है। सत्यम वर्मा के साथ हिमांशु ठाकुर को भी गिरफ्तार किया गया था। इनपर भीड़ को भड़काने और हिंसा फैलाने का आरोप है। ये लोग पिछले करीब महीने भर से पर्चा बाँट रहे थे और मजदूरों को भड़का रहे थे।
NSA के तहत कार्रवाई, पुलिस ने बताए गंभीर आरोप
पुलिस का कहना है कि 13 अप्रैल 2026 को हुए प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसक घटनाएँ, आगजनी और अराजकता देखने को मिली थी। जाँच में सत्यम वर्मा और आकृति चौहान की भूमिका गंभीर पाई गई, जिसके बाद दोनों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
पुलिस का दावा है कि आंदोलन को सुनियोजित तरीके से भड़काया गया था और कुछ संगठनों के सदस्यों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई थी। जाँच में मजदूर बिगुल दस्ता नामक संगठन का नाम भी सामने आया है। मामले में गिरफ्तार रूपेश और आदित्य आनंद से भी पूछताछ की जा रही है।
गौरतलब है कि नोएडा में 13 अप्रैल 2026 को श्रमिकों का आंदोलन अचानक हिंसक रूप ले बैठा था। पुलिस के मुताबिक फेज-2 और सेक्टर-63 थाना क्षेत्रों में 300 से अधिक कंपनियों में तोड़फोड़ की गई थी और दो दर्जन से ज्यादा वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।
सड़क जाम, पथराव और आगजनी की घटनाएँ भी सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने अलग-अलग थानों में 13 से अधिक मुकदमे दर्ज किए थे और 62 लोगों को गिरफ्तार किया था।
ऑपइंडिया ने मुख्य आरोपित और मजदूर बिगुल की कारस्तानियों को लेकर पहले भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी। उसे यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

