पाकिस्तान से रची गई नोएडा हिंसा की साजिश, डिजिटली भड़काए गए 42 हजार+ ‘मजदूर’: पढ़िए कैसे QR कोड और VPN से आसान हुआ साजिशकर्ताओं का काम

नोएडा में हिंसा में मामले में पुलिस ने एक चौकाना वाला खुलासा किया है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के मुताबिक, इस बवाल के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े मिले हैं। जाँच में सामने आया है कि जब नोएडा की सड़कों पर आगजनी और पथराव हो रहा था, उस वक्त पाकिस्तान से संचालित दो ‘X’ (ट्विटर) हैंडल ‘@MeerIlayasi और @AyushiTiwari’ भ्रामक खबरें फैलाकर माहौल बिगाड़ रहे थे। ये हैंडल पिछले तीन महीनों से एक्टिव थे और पहचान छिपाने के लिए VPN का इस्तेमाल कर रहे थे। बता दें कि @MeerIlayasi नामक हैंडल चलाने वाले शख्स ने अपने बायो में खुद को ‘कॉन्ग्रेस का नामित सोशल मीडिया संयोजक’ बताया है। इसकी DP में राहुल गाँधी की तस्वीर भी लगाई गई है।

सोची-समझी साजिश के तहत भड़काई गई आग

पुलिस जाँच में यह साफ हो गया है कि फैक्ट्री मजदूरों का यह आंदोलन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसे ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ जैसे संगठनों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत हिंसक बनाया था। 9 और 10 अप्रैल को QR कोड के जरिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए और 42 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को डिजिटल माध्यमों से उकसाया गया।

11 अप्रैल 2026 को प्रशासन के साथ समझौता होने के बावजूद, इन साजिशकर्ताओं ने उत्तेजित भाषण देकर मजदूरों को 13 अप्रैल को सड़कों पर उतरने और हिंसा करने के लिए मजबूर किया।

तीन मुख्य साजिशकर्ताओं की पहचान, दो गिरफ्तार

पुलिस ने इस पूरी हिंसा के पीछे तीन मास्टरमाइंड की पहचान की है। इनमें रूपेश राय (मजदूर बिगुल दस्ता का प्रमुख) और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीसरा आरोपित आदित्य आनंद फिलहाल फरार है।

पुलिस के अनुसार, रूपेश और आदित्य पेशेवर प्रदर्शनकारी हैं, जो 2018-20 से देशभर में जहाँ भी आंदोलन होता है, वहाँ सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ये लोग औद्योगिक क्षेत्रों की शांति भंग करने के लिए डेटाबेस का इस्तेमाल कर मजदूरों को निशाना बना रहे थे।

62 लोग गिरफ्तार, दोषियों पर लगेगा NSA

नोएडा में दो दिनों तक चली इस हिंसा में 50 से ज्यादा गाड़ियाँ फूँक दी गई थीं और जमकर पत्थरबाजी हुई थी। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब तक कुल 13 FIR दर्ज की गई हैं और 62 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

गिरफ्तार लोगों में आगजनी करने वाले और पुलिस पर हमला करने वाले शामिल हैं, जिनमें से कई मजदूर नहीं बल्कि बाहरी तत्व हैं। पुलिस ने साफ किया है कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ NSA (रासुका) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने बढ़ाया वेतन, फिर भी जारी रही हिंसा

गौरतलब है कि कर्मचारी न्यूनतम वेतन बढ़ाने और शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए यूपी सरकार ने सोमवार रात ही न्यूनतम मजदूरी में 3000 रुपए तक की बढ़ोतरी का फैसला लिया था, जो 1 अप्रैल से लागू माना जाएगा।

इसके बावजूद, पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया हैंडल्स और स्थानीय साजिशकर्ताओं ने भ्रामक सूचनाएँ फैलाकर माहौल को शांत नहीं होने दिया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखी जा रही है।