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नोएडा से गुरुग्राम तक हुई हिंसा की साजिश रचने में आया जिस ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ का नाम, जानिए उससे जुड़े हैं कौन लोग

लखनऊ के 'कॉमरेड अरविंद मेमोरियल ट्रस्ट' के अंतर्गत कई संगठन चलाए जा रहे हैं। ये महिलाओं, छात्रों और युवाओं को अपने साथ जोड़ते हैं। इसके लिए आरडब्लूपीआई, नौजवान भारत सभा, एकता संघर्ष समिति, दिशा संगठन, 'मजदूर बिगुल' आदि संगठन बनाए गए हैं।

नोएडा हिंसा को लेकर ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ नाम के संगठन की साजिश का पता चला है। इससे मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद 2022 से जुड़ा हुआ था। मजदूर आंदोलन की आड़ में आगजनी, पथराव और सड़कें जाम की गई। आदित्य आनंद और उसके दोस्त रुपेश, मनीषा की गिरफ्तारी के बाद एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं।

नोएडा से गुरुग्राम, मानेसर से लेकर दिल्ली तक, जितने मजदूर आंदोलन हुए और हिंसा फैलाई गई, उसमें ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ का हाथ सामने आ रहा है।

किन-किन संगठनों ने रची साजिश

जाँच एजेंसियों के मुताबिक, लखनऊ के ‘कॉमरेड अरविंद मेमोरियल ट्रस्ट’ के अंतर्गत कई संगठन चलाए जा रहे हैं। ये महिलाओं, छात्रों और युवाओं को अपने साथ जोड़ते हैं। इसके लिए आरडब्लूपीआई, नौजवान भारत सभा, एकता संघर्ष समिति, दिशा संगठन, ‘मजदूर बिगुल’ आदि संगठन चलाते हैं।

नोएडा हिंसा से पहले तीन दिनों तक इन संगठनों की आदित्य आनंद के नोएडा के सेक्टर 37 के अरुण विहार स्थित फ्लैट में बैठक हुई थी। ये बैठक तीन दिन 30 मार्च, 31 मार्च और 1 अप्रैल तक चली। बैठक में पूरी योजना बनाई गई। यह फ्लैट आदित्य आनंद ने एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल से किराए पर लिया था।

साजिशकर्ता और सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद ने लोगों को जुटाने के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया। व्हाट्स एप ग्रुप के क्यूआर कोड के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा गया। ये ग्रुप 9-10 अप्रैल को बनाए गए। पहले तो मजदूरों को उनकी माँगों के लिए प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद प्रदर्शन को हिंसक बनाने की साजिश रची गई। यही वजह है कि योगी सरकार ने जब माँगे मान ली, फिर भी हिंसा का वारदात हुई। कई जगहों पर सड़क जाम किया गया।

नामी गिरामी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद अपनी अच्छी खासी कमाई संगठन को दे रहा था। संगठन लोगों को कितना ‘जहरीला’ बना रहा था, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक आरोपित ने पूछताछ में नक्सलियों के खात्मे के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन कगार’ को चुनौती दे दी। इससे साफ पता चलता है कि संगठन सिर्फ मजदूरों के नाम पर साजिश नहीं कर रहा, बल्कि इसके पीछे वामपंथ की खौफनाक विचारधारा है।

तकनीक का जमकर किया साजिश में इस्तेमाल

हिंसा के पैटर्न से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तकनीक का इस्तेमाल भी इनलोगों ने जमकर किया। आनंद के घर पर एजेंसियों को पूरा ब्लूप्रिंट मिला है। इससे पता चलता है कि एक टारगेट पूरा होने के बाद व्हाटसएप ग्रुप डिलीट हो जाता था। इसके एडमिश को खास तरह के निर्देश दिए गए थे। वह ग्रुप से ‘लेफ्ट’ हो जाता था, ताकि पुलिस डिजिटल ट्रेल का पीछा न कर सके।

गुरुग्राम और मानेसर के बाद नोएडा तक यह तरीका अपनाया गया। ये लोग दिल्ली-एनसीआर में हर वह मुद्दा उठाना चाहते थे, जिससे लोग सड़कों पर उतर सकें और साजिश को अंजाम दिया जा सके।

नोएडा हिंसा केस में पुलिस को आदर्श नगर और शाहबाद डेयरी से कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और दस्तावेज मिली हैं। पुलिस ने दो और आरोपित हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। इनपर भीड़ को भड़काने और हिंसा फैलाने का आरोप है। ये लोग पिछले करीब महीने भर से पर्चा बाँट रहे थे और मजदूरों को भड़का रहे थे।

कुछ चैट्स में प्रदर्शनकारियों को मिर्ची पाउडर साथ लाने की सलाह दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। एक मैसेज में लिखा गया कि अगर पुलिस लाठी उठाए तो मिर्ची पाउडर काम आएगा और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे लेकर आएँ। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

कुछ ऐसे ही चैट मानेसर में हुई हिंसक आंदोलन को लेकर भी सामने आई है। इसमें कंपनी के मैनेजर को मारने और कंपनी में आग लगाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस की जाँच जारी है।

पुलिस अब ये पता लगाने में लगी है कि पूरे नेटवर्क का आर्थिक सोर्स क्या है। इनके विदेशी कनेक्शन की भी जाँच हो रही है। सफल युवाओं को आखिर किस तरह से संगठन ने जोड़ा और इसके पीछे खतरनाक प्लानिंग किसकी है? इसकी जाँच की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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