कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि ‘द्रविड़ ताकतों’ के बिना तमिलनाडु में चुनाव नहीं जीत पाते। उन्होंने यह भी कहा कि यह ताकतें अलग देश की माँग कर रही है। अय्यर के इस बयान से कॉन्ग्रेस की देश को बाँटने वाली सोच सामने आती है।
दरअसल, खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव 2025 के तहत ‘भारत के भविष्य के लिए राजीव गांधी की विरासत का पुनर्मूल्यांकन’ कार्यक्रम में बोलते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा, “कोई भी तमिलनाडु को ठीक से नहीं समझता। असल में यह भारत के किसी भी अन्य राज्य जैसा राज्य नहीं है, यही वजह है कि पी चिदंबरम या मैं, द्रविड़ ताकतों की मदद के बिना चुनाव नहीं जीत सकते हैं। और ये द्रविड़ ताकतें एक सदी से एक अलग भारत चाहती रही हैं।”
?Shocking statement by Mani Shankar Aiyar
— Ankur Singh (@iAnkurSingh) October 12, 2025
"Neither me nor Chidambaram can be elected from Tamil Nadu without help of Dravidian forces.
"And Dravidian forces want a separate Country"
Congress leaders first started North vs South and now openly talks about dividing India pic.twitter.com/C7N9gAqSOF
क्या है द्रविड़ ताकत?
बता दें कि द्रविड़ ताकतों का जिक्र अक्सर दक्षिण भारत की राजनीति में होता रहता है। खासतौर पर यह तमिलनाडु की मुख्य राजनीतिक विचारधारा है, जो द्रविड़ लोगों के अधिकारों की रक्षा करना चाहती है। द्रविड़ राजनीति की शुरुआत ब्रिटिश भारत में 20 नवंबर 1916 को मद्रास के विक्टोरिया पब्लिक हॉल में जस्टिस पार्टी के गठन के साथ हुई, जिसे सी नटेसा मुदलियार ने टीएम नायर और पी. थेगरया चेट्टी के साथ मिलकर बनाया था।

