भारत की ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी ONGC ने रविवार (29 मार्च 2026) को दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत गैस मोनेटाइजेशन की शुरुआत कर दी है। इस प्रोजेक्ट से पहली गैस सप्लाई हजीरा प्लांट तक पहुँचा दी गई है। इससे देश की घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यह प्रोजेक्ट अरब सागर में स्थित है, जो मुंबई से लगभग 180 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और गुजरात के पिपावाव से करीब 80 किलोमीटर दक्षिण में है। डामन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1 अरब अमेरिकी डॉलर बताई गई है।
ONGC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि डामन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (DUDP) ने 29 मार्च 2026 को एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है। प्रोजेक्ट के तहत प्लेटफॉर्म B-12-24P से गैस प्रवाहित कर मोनेटाइजेशन शुरू किया गया है। इस प्लेटफॉर्म को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है और यहाँ से गैस हजीरा प्लांट भेजी गई है।
The #ONGC Daman Upside Development Project (DUDP), in the Arabian Sea, located about 180 km north west of Mumbai and about 80 km south of Pipavav, Gujarat, with a Capex of about USD 1 billion, has achieved a significant milestone on 29 March 2026 by monetisation through flowing… pic.twitter.com/lbpT2XrU93
— Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) (@ONGC_) March 30, 2026
कंपनी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को अवॉर्ड मिलने के दो साल से भी कम समय में पूरा किया गया है। यह उपलब्धि मजबूत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, ड्रिल-डेक के इनोवेटिव इस्तेमाल और ड्रिलिंग व प्रोडक्शन टीमों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से संभव हो पाई है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
मिडिल ईस्ट के तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तेहरान की ओर से होर्मुज और बाब-अल-मंडेब जैसे अहम समुद्री मार्गों को बंद करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में भारत के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करना अब और जरूरी है, क्योंकि देश अपनी आधे से ज्यादा प्राकृतिक गैस की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है।
इसी संदर्भ में नए गैस प्रोजेक्ट की शुरुआत भारत के लिए किसी बड़ी रणनीतिक राहत से कम नहीं है। इससे न सिर्फ देश में गैस उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आयात पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम होगी। घरेलू उत्पादन में वृद्धि का सीधा फायदा विदेशी मुद्रा की बचत के रूप में भी देखने को मिलेगा।
सबसे अहम बात यह है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी कारण से गैस सप्लाई प्रभावित होती है, जैसे कि युद्ध या समुद्री रास्तों में रुकावट, तो यह प्रोजेक्ट देश की ऊर्जा जरूरतों को संतुलित रखने में सहायक साबित होगा।

