पाकिस्तान के शक्तिशाली अफसर फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है कि वह गाजा में नई स्थिरीकरण फोर्स के लिए अपने सैनिक भेजे। मुनीर के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति है, अगर वो हाँ कहते हैं तो देश में विरोध हो सकता है और अगर मना करते हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हो सकते हैं।
Trump puts Asim Munir on Gaza test: Can Pak army chief appease U.S & avoid backlash at home?
— The Times Of India (@timesofindia) December 17, 2025
Watch #GlobalPulse with @nehakhanna_07 #DonaldTrump #Pakistan #USA #AsimMunir #Gaza pic.twitter.com/uOtMaq7bcW
मुनीर जल्द ही वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। यह छह महीनों में उनकी ट्रंप से तीसरी मुलाकात होगी, जो उनके करीबी और गहरे रिश्ते को दिखाता है। सूत्रों के मुताबिक चर्चा का मुख्य विषय ट्रंप का गाजा के लिए 20 बिंदुओं का प्लान होगगा, जिसमें मुस्लिम बहुल देशों के सैनिकों को शांति बनाए रखने और दो साल से अधिक चल रहे युद्ध के बाद क्षेत्र को फिर से बसाने में मदद करने के लिए शामिल किया जाने के सुझाव हैं।
अमेरिका अब पाकिस्तान के पीछे क्यों है?
अब पाकिस्तान कोई आम देश नहीं है। यह एकमात्र मुस्लिम देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं और इस देश के पास एक बड़ी ‘युद्ध में निपुण’ फौज है। इस ताकत के चलते मुनीर पर अमेरिकी योजना के लिए अपनी इस फौजी शक्ति का इस्तेमाल करने का ज्यादा दबाव है।
यह मिशन आसान नहीं है। इसका मकसद केवल शांति बनाए रखना नहीं है, बल्कि इसमें हमास जैसे समूहों को हथियारबंद करना भी शामिल है। कई देश लंबे और जटिल संघर्ष में फँसने से डर रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में संकेत दिया कि इस्लामाबाद शांति बनाए रखने में मदद कर सकता है, लेकिन हमास को हथियारबंद करना ‘हमारा काम नहीं’ है।
मुनीर को पाकिस्तान में आंतरिक विरोध की आशंका
मुनीर की सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान के अंदर की प्रतिक्रिया है। देश में अधिकांश लोग फिलिस्तीन के पक्ष में हैं और अमेरिका व इजरायल की नीतियों पर संदेह रखते हैं। अगर अमेरिकी समर्थन वाली योजना के तहत पाकिस्तानी फौजी गाजा में दिखाई दिए, तो कई लोग इसे इजरायल की मदद समझ सकते हैं।
यह मुनीर के आलोचकों के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है। पाकिस्तान में इस्लामी दलों के पास सड़कों पर हजारों लोगों को निकालने की ताकत है। हालाँकि सरकार ने कुछ हिंसक समूहों पर पाबंदी लगा दी है, बावजूद उनके विचार अब भी लोकप्रिय हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी, जिसे अभी भी जनसमर्थन हासिल है, इसका इस्तेमाल मुनीर की सत्ता को चुनौती देने के लिए कर सकती है।
मुनीर की बेलगाम ताकत
इन खतरों के बावजूद असीम मुनीर अब पहले से ज्यादा ताकतवर स्थिति में हैं। वे अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं, जिससे उन्हें पाकिस्तान की तीनों डिफेंस फोर्सेसपर कम से कम 2030 तक नियंत्रण प्राप्त है। उन्हें किसी भी अपराध के लिए आजीवन अभियोजन से छूट प्राप्त है।
साउथ एशिया के विशेषज्ञ माइकल कुगेलेमन के मुताबिक, चूँकि मुनीर की सत्ता अब कानूनी रूप से संरक्षित है, इसीलिए उनके पास दूसरों की तुलना में बड़े जोखिम उठाने की सुविधा है। वे पहले ही सऊदी अरब, तुर्की और कतर जैसे देशों के नेताओं से बात कर हैं, यह पता लगाने के लिए कि क्या संयुक्त मुस्लिम फोर्स बनाना संभव है।
ट्रंप की कृपा में बने रहना मुनीर का उद्देश्य
यह निर्णय पैसे और सुरक्षा पर भी निर्भर कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुश्किल में है और मुनीर अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए मेहनत कर रहे हैं ताकि निवेश और सैन्य सहायता मिल सके। ट्रंप ने हाल ही में उन्हें व्हाइट हाउस में लंच पर बुलाया, जो किसी सैन्य प्रमुख के लिए बिना किसी सिविलियन नेता के मौजूदगी के बहुत सम्मान की बात है।
एक विशेषज्ञ के अनुसार, मुनीर ट्रंप को नाराज नहीं करना चाहते हैं। लेकिन जनता पहले से ही चिंतित है, इसलिए फील्ड मार्शल जैसी ताकतवर अफसर के लिए गाजा में सैनिक भेजना शायद एक बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है।

