पाकिस्तान में सेना और सरकार विरोधी आवाजों को दबाने का सिलसिला लगातार गंभीर होता जा रहा है और विरोधियों को जेल में ठूँसा जा रहा है। शनिवार (24 जनवरी 2026) को देश की जानी मानी मानवाधिकार वकील इमान जैनब मजारी और उनके पति अधिवक्ता हादी अली चट्ठा को सोशल मीडिया गतिविधियों से जुड़े एक मामले में 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह मामला राज्य द्वारा गैरकानूनी माने गए ऑनलाइन कंटेंट से जुडा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह केस 12 अगस्त 2025 को इस्लामाबाद की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) में दर्ज शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि माजरी हाजिर ने सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट साझा किया जो प्रतिबंधित संगठनों के कथित विचारों और प्रचार से मेल खाता है। हादी पर उनकी कुछ पोस्ट शेयर करने का आरोप लगाया गया। गौरतबल है कि इमान मजारी देश के कुछ सबसे संवेदनशील मामलों को बिना कोई फीस लिए लड़ती हैं। इनमें बलूचों के जबरन गायब होने के साथ-साथ बलूचों के शीर्ष कार्यकर्ता महरंग बलूच का बचाव भी शामिल है।
दोनों को 30 अक्टूबर 2025 को आरोपित किया गया था। शुक्रवार को अदालत में पेशी के लिए जाते समय इस्लामाबाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफजल माजोका ने फैसला सुनाया। अदालत के लिखित आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक अपराध निवारण अधिनियम (PECA) की कई धाराओं में अपराध साबित किया। जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को धारा 9 के तहत 5 साल, धारा 10 के तहत 10 साल और धारा 26 ए के तहत 2 साल की सजा दी गई। इस तरह कुल सजा 17 साल हो गई।
बहिष्कार से पहले माजरी हाजिर ने अदालत में हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और उन्हें खाना व पानी नहीं दिया जा रहा। इसके बाद दोनों ने आगे की कार्यवाही में शामिल होने से इनकार कर दिया। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब 15 जनवरी को अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी और अगले ही दिन गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे।
माजरी हाजिर की माँ शिरीन माजरी ने कहा कि दोनों को अलग अलग वाहनों में अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया। उन्होंने इसे सत्ता का घमंड और दमन की चरम स्थिति बताया। इस मामले को लेकर पाकिस्तान के कानूनी समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस्लामाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, इस्लामाबाद बार एसोसिएशन और इस्लामाबाद बार काउंसिल ने कडी निंदा की।

