प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक खुशखबरी सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की है कि वह भारत की तीन प्राचीन धार्मिक कलाकृतियाँ वापस लौटाएगा।
इनमें देवी भद्रकाली की छवि वाला धातु का त्रिशूल, भगवान शिव के वाहन नंदी की पत्थर की मूर्ति और छह सिर वाले भगवान कार्तिकेय की दुर्लभ पत्थर की प्रतिमा शामिल हैं। इन सभी धरोहरों का संबंध तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों से है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह फैसला दोनों देशों के बीच दोस्ती और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
ऑस्ट्रेलिया ने क्यों लौटाईं ये प्राचीन धरोहरें?
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बताया कि ये कलाकृतियाँ पहले ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी और न्यू साउथ वेल्स की आर्ट गैलरी के संग्रह में रखी गई थीं। अब इन्हें स्वेच्छा से भारत को लौटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना और ऐतिहासिक धरोहरों को उनके मूल स्थान तक पहुँचाना ऑस्ट्रेलिया की जिम्मेदारी है।
In a profound testament to the civilisational resonance anchoring modern diplomacy, Australia is set to repatriate three culturally significant ancient antiquities to India.
— Ministry of Culture (@MinOfCultureGoI) July 9, 2026
These artefacts include a ceremonial bronze trident of Goddess Bhadrakali, a majestic granite idol of… pic.twitter.com/knmUGuo8Nn
भारत लौटाई जा रही धरोहरों में सबसे खास देवी भद्रकाली की आकृति वाला धातु का त्रिशूल है, जो तमिलनाडु के कोल्लुमंगुडी स्थित श्री काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर से जुड़ा माना जाता है और 13वीं से 16वीं शताब्दी का बताया जाता है।
इसके अलावा नंदी की पत्थर की मूर्ति भी इसी मंदिर से संबंधित है। वहीं तीसरी प्रतिमा चोल काल की छह सिर वाले भगवान कार्तिकेय की है, जो तंजावुर जिले के मनमबाड़ी स्थित नागनाथस्वामी मंदिर से जुड़ी मानी जाती है।
मोदी-अल्बनीज की मुलाकात में सांस्कृतिक रिश्तों पर भी जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मेलबर्न में तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पहले आमने-सामने बातचीत की और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई।
इस दौरान दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के छह वर्ष पूरे होने पर संतोष जताया गया। साथ ही बढ़ते सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच मजबूत होते संबंधों पर भी चर्चा हुई।
इस मौके पर ऑस्ट्रेलिया ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। अल्बनीज ने बताया कि चेन्नई के सरकारी संग्रहालय में सुरक्षित ऑस्ट्रेलिया के ‘फर्स्ट नेशंस’ समुदाय के एक पूर्वज के अवशेष भी उनके पारंपरिक संरक्षकों को वापस सौंपे जाएँगे।
उन्होंने कहा कि यह कदम न्याय, सम्मान, मेल-मिलाप और ऐतिहासिक घावों को भरने की दिशा में महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस प्रक्रिया में सहयोग का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों और ऐतिहासिक विरासत का सम्मान भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को भविष्य में और मजबूत बनाएगा।

