केरल के त्रिशूर जिले में मंगलवर (11 नवंबर 2025) को बने नए पुत्थूर जूलॉजिकल पार्क में 10 हिरण मृत पाए गए। यह घटना पार्क की सुरक्षा और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
शुरुआती जाँच के अनुसार, रात के समय कुछ आवारा कुत्ते हिरणों के बाड़े में घुस गए थे। डर के मारे हिरण या तो कुत्तों के हमले में घायल होकर मर गए या भागते समय दम तोड़ बैठे। सभी हिरणों की मौत का सही कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चलेगा।
हालांकि, जू प्रशासन का कहना है कि कुत्तों के बाड़े में घुसने की संभावना बहुत कम है। जू डायरेक्टर बी एन नागराज ने कहा कि असली वजह जाँच के बाद ही साफ होगी। इस मामले में वन मंत्री एके ससींद्रन ने जाँच के आदेश दिए हैं और मुख्य वन्यजीव संरक्षक प्रमोद जी कृष्णन ने मौके का निरीक्षण किया है।
जाँच दल ने मौके से लिए सैंपल
मृत हिरणों के मिलने के बाद डॉ अरुण जकारिया की अगुवाई में वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम जाँच के लिए पुत्थूर जूलॉजिकल पार्क पहुँची। अधिकारियों ने घटना वाली रात की CCTV फुटेज जारी करने से इनकार कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरणों को रातभर खुले बाड़े में ही छोड़ा गया था, क्योंकि आमतौर पर उन्हें छोटे बंद बाड़ों में नहीं रखा जाता। इन हिरणों को पुराने त्रिशूर जू (चेमबुक्काव) से नए पार्क में लाना काफी मुश्किल काम था, क्योंकि चीतल (स्पॉटेड डियर) ट्रांसपोर्ट के दौरान बहुत जल्दी तनाव में आ जाते हैं।
वन्यजीवों के लिए सिक्योरिटी ऑडिट की माँग
इस घटना ने पुत्थूर जूलॉजिकल पार्क की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों ने पूरे जू की सुरक्षा जाँच (सेफ्टी ऑडिट) करने की माँग की है।
‘फ्रेंड्स ऑफ जू’ नाम के संगठन, जिसने पुत्थूर जू की स्थापना में योगदान दिया था, उन्होंने वन विभाग से कहा है कि जू डिजाइनरों की एक टीम बनाई जाए जो सभी बाड़ों की समीक्षा करे ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
संगठन के सचिव एम पीथाम्बरन ने यह भी माँग की है कि पुराने जू से और जानवर लाने से पहले केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority) इस पार्क की तैयारी की आधिकारिक जाँच करे।
त्रिशूर का यह पुत्थूर जूलॉजिकल पार्क एशिया का दूसरा सबसे बड़ा और भारत का पहला डिज़ाइनर जू बताया जा रहा है। यह 336 एकड़ में फैला है और इसमें 23 प्राकृतिक बाड़ों में 80 प्रजातियों के 534 जानवरों को रखा जा सकता है।
इसका उद्घाटन 28 अक्टूबर को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने किया था। फिलहाल केवल स्कूल और कॉलेज के समूहों को ही पार्क में प्रवेश दिया जा रहा है। लेकिन हिरणों की मौत के बाद आम जनता के प्रवेश और बाकी जानवरों को एक जगह से दूसरे जगह भेजने में देरी हो सकती है।
आवारा कुत्ते वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा
भारत में आवारा या जंगली कुत्ते वन्यजीवों के लिए एक बड़ी खतरा बन गए हैं। पिछले दो दशकों में इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, खासकर 2001 में मनका गाँधी के नेतृत्व में बने ABC नियमों (Animal Birth Control Rules) के लागू होने के बाद।
देशभर से कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जहाँ जंगली कुत्तों ने जंगलों में कई जानवरों को मार डाला है। ये कुत्ते प्रवासी पक्षियों पर हमला करते हैं, हिरण जैसे जानवरों को मारते हैं, जमीन पर अंडे देने वाले पक्षियों के अंडे खा जाते हैं और छोटे जानवरों का शिकार करते हैं। इसके अलावा, इन कुत्तों से फैलने वाली बीमारियाँ – जैसे रेबीज (Rabies) और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV), जंगली जानवरों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
(ऑपइंडिया देश में आवारा कुत्तों के खतरे पर एक श्रृंखला चला रहा है जिसे यहाँ देखा जा सकता है)

