अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने के बाद बढ़े दबाव को देखते हुए RBI ने निर्यातकों के लिए बड़े राहत पैकेज की घोषणा की है। इसमें 4 महीने का लोन मोरेटोरियम, क्रेडिट नियमों में ढील, FEMA बदलाव और लंबी रिपेमेंट अवधि शामिल है।
अमेरिका द्वारा 27 अगस्त 2025 से भारतीय उत्पादों पर 50% का भारी टैरिफ लगाने के बाद निर्यात क्षेत्र पर दबाव तेजी से बढ़ गया है। इसी वित्तीय तनाव को कम करने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने निर्यातकों के लिए व्यापक राहत उपायों की घोषणा की है। यह पैकेज 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक चार महीने के मोरेटोरियम, क्रेडिट में ढील और FEMA नियमों में बदलाव जैसी कई बड़ी छूटें प्रदान करता है।
नए प्रावधानों के तहत निर्यातकों को इस अवधि में टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल की EMI चुकाने की आवश्यकता नहीं होगी। ब्याज, सरल ब्याज के रूप में अलग खाते में जमा होगा, जिसकी अदायगी मार्च से सितंबर 2026 के बीच की जा सकेगी। इसके अलावा, बैंकों को वर्किंग कैपिटल मार्जिन कम करने और ड्रॉइंग पावर बढ़ाने की अनुमति दी गई है, जिससे नकदी संकट से जूझ रहे निर्यातकों को राहत मिलेगी।
RBI ने प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट की अधिकतम अवधि 270 दिनों से बढ़ाकर 450 दिन कर दी है। वहीं, FEMA नियमों में संशोधन करते हुए निर्यात आय को भारत वापस लाने की समय सीमा 9 महीने से बढ़ाकर 15 महीने कर दी गई है। अग्रिम भुगतान पर निर्यात पूरा करने की समय सीमा भी 1 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है।
अमेरिकी टैरिफ के कारण सितंबर में भारत का US निर्यात 12% घट गया, जिससे कई सेक्टरों में भुगतान देरी और कैश फ्लो संकट गहरा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयास अल्पकालिक वित्तीय स्थिरता प्रदान करेंगे और निर्यातकों को मौजूदा वैश्विक तनाव से उबरने में मदद करेंगे।

