सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी 2026) को हिंदू धर्म की ‘उच्च जाति’ से बौद्ध धर्म अपनाने का दावा करने वाले शख्स की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसने बौद्ध धर्म अपना लिया है और अब वह अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को सख्त शब्दों में खारिज करते हुए कहा कि यह ‘धोखाधड़ी का एक नया तरीका’ है।
Plea seeking admission on the ground of being a minority candidate:
— Bar and Bench (@barandbench) January 28, 2026
CJI: you are a Punia? What minority are you? Let me ask this bluntly now. Which Punia are you?
Adv: Jaat punia
CJI: then how minority?
Adv: converted to Buddhism. That is my right.
CJI Kant: Wow! This is a… pic.twitter.com/oR4IbiBakw
इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ कर रही थी। यह याचिका निखिल कुमार पुनिया ने भारत संघ के खिलाफ दायर की थी, जिसमें उन्होंने कथित धर्मांतरण के आधार पर खुद को अल्पसंख्यक उम्मीदवार के रूप में दाखिला देने की माँग की थी।
आप कौन से पुनिया हैं?: कोर्ट ने पूछा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता के दावे की बुनियाद पर ही सवाल खड़े कर दिए। CJI कांत ने याचिकाकर्ता के वकील से सीधे उसकी जाति के बारे में पूछा। CJI ने कहा, “आप पुनिया हैं? आप किस अल्पसंख्यक वर्ग से हैं? मैं साफ-साफ पूछ रहा हूँ कि आप कौन से पुनिया हैं?”
इस पर वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ‘जाट पुनिया’ समुदाय से संबंध रखता है। इसके बाद पीठ ने सवाल किया कि जब वह जाट पुनिया समुदाय से है तो वह अल्पसंख्यक दर्जा कैसे मांग सकता है। वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने बौद्ध धर्म अपना लिया है और इसे अपना अधिकार बताते हुए अल्पसंख्यक लाभ की माँग की।
इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए CJI कांत ने कहा, “वाह! यह तो धोखाधड़ी का एक नया तरीका है।” इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने साफ कर दिया कि वह इसे आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग की कोशिश मानती है।
हरियाणा सरकार को गाइडलाइंस साफ करने का निर्देश
याचिका खारिज करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े दिशा-निर्देश सामने रखे। अदालत ने यह भी स्पष्टता माँगी कि क्या उच्च जाति के सामान्य वर्ग के उम्मीदवार, खास तौर पर वे जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में नहीं आते और जिन्होंने पहले खुद को सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार घोषित किया था, बाद में बौद्ध धर्म अपनाने का दावा कर अल्पसंख्यक दर्जा माँग सकते हैं या नहीं।

