श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में स्थित ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर के कपाट पूरे 36 साल बाद फिर से खोल दिए गए हैं। 1990 के दशक में घाटी के बिगड़ते हालातों और कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद यह मंदिर सूना पड़ गया था।
रामनवमी के पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसने स्थानीय लोगों के दिलों में सांप्रदायिक सद्भाव और पुरानी संस्कृति की वापसी की उम्मीद जगा दी है।
1857 में बना था यह ऐतिहासिक मंदिर
श्रीनगर के हब्बा कदल इलाके में स्थित रघुनाथ मंदिर कश्मीर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसका निर्माण साल 1857 में हुआ था। दशकों तक यह मंदिर कश्मीरी संस्कृति और आस्था का बड़ा केंद्र रहा, लेकिन आतंकवाद और अशांति के दौर में यहाँ पूजा-पाठ बंद हो गया था।
अब 36 साल लंबे इंतजार के बाद मंदिर की साफ-सफाई कर इसे भक्तों के लिए फिर से तैयार किया गया है। मंदिर कमेटी ने जानकारी दी है कि आने वाले कुछ महीनों में यहाँ भव्य तरीके से मूर्तियों की स्थापना भी की जाएगी।
भाईचारे और ‘कश्मीरियत’ की वापसी
इस मंदिर का खुलना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इसे ‘कश्मीरियत’ और आपसी भाईचारे की जीत के रूप में देखा जा रहा है। रामनवमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल कश्मीरी पंडितों ने हिस्सा लिया, बल्कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने भी खुशी जताई।
मंदिर कमेटी के सदस्यों ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए आभार व्यक्त करने का है। स्थानीय प्रशासन और लोगों की मदद से अब घाटी के पुराने मंदिरों को फिर से जीवंत किया जा रहा है।
शीतल नाथ मंदिर के बाद एक और बड़ी शुरुआत
रघुनाथ मंदिर से पहले श्रीनगर का शीतल नाथ मंदिर भी 31 साल बाद खोला जा चुका है। वहाँ बसंत पंचमी के दिन विशेष प्रार्थनाएँ की गई थीं। एक के बाद एक मंदिरों का खुलना यह दर्शाता है कि कश्मीर में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। पर्यटन और धार्मिक आस्था के नजरिए से भी यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले समय में यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचेंगे।

