सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ा अपना 6 महीने पुराना फैसला पलटा, जुर्माना भरकर शुरू हो सकेंगे प्रोजेक्ट्स: कहा- इससे ₹20000 करोड़ बचेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए, 6 महीने पहले दिए अपने ही एक आदेश को पलट दिया है। इस पुराने आदेश में कहा गया था कि अगर कोई प्रोजेक्ट बिना पर्यावरण मंजूरी के शुरू होता है, तो उसे बाद में मंजूरी नहीं मिल सकती। लेकिन अब कोर्ट ने कहा है कि भारी जुर्माना लगाकर ऐसे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा सकती है। कोर्ट ने यह बदलाव इसलिए किया ताकि ₹20,000 करोड़ की सरकारी परियोजनाएँ टूटने से बच सकें और जनता का पैसा बर्बाद न हो

जनहित में लिया गया फैसला

जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन ने इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 16 मई का पुराना फैसला सही नहीं था और उसे वापस लेना जरूरी है। अगर वह फैसला लागू रहता तो कई जरूरी प्रोजेक्ट, जैसे ओडिशा का 962 बेड वाला AIIMS अस्पताल और कर्नाटक का एयरपोर्ट, ध्वस्त करने पड़ते।

उन्होंने साफ कहा कि सार्वजनिक हित को देखते हुए, देर से मंजूरी देना सही है, खासकर तब जब तोड़ने से हजारों करोड़ रुपए बर्बाद हो रहे हों। कोर्ट ने माना कि कुछ खास (असाधारण) मामलों में बाद में मंजूरी दी जा सकती है।

तीसरे जज ने क्यों जताई असहमति?

बेंच में शामिल तीसरे जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि पीछे की तारीख से पर्यावरण मंजूरी देना कानून के खिलाफ है। उन्होंने इसे ‘पर्यावरण कानून के लिए अभिशाप’ बताया।

जस्टिस भुइयां का कहना था कि यह फैसला पर्यावरण को बचाने के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे प्रकृति को नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का फैसला पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को पीछे की ओर धकेलता है। अब यह मामला दोबारा सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होगा।