जमात का मिला साथ, 17 साल बाद बांग्लादेश लौटेगा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा का बेटा तारिक रहमान: 84 केसों में युनूस सरकार ने किया था बरी, अब BNP चाहती है PM बनाना

बांग्लादेश में हिंसा और आगामी चुनावों की हलचल के बीच एक नाम चर्चा में है। वह है तारिक रहमान का। तारिक रहमान 17 साल बाद बांग्लादेश लौटने की तैयारी में है। वे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वे बांग्लादेशी राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया-उर-रहमान के बड़े बेटे हैं। रहमान की वापसी से बांग्लादेश की राजनीति में कई मायने सामने आ रहे हैं।

बता दें कि 16 दिसंबर 2025 को लंदन में BNP के एक कार्यक्रम में तारिक रहमान ने घोषणा की था कि वे आगामी फरवरी 2026 में चुनावों के मद्देनजर 25 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश लौट रहे हैं। वहीं उनकी अम्मी पूर्व पीएम खालिदा रहमान ढाका के एक अस्पताल में भर्ती हैं।

कौन हैं तारिक रहमान?

तारिक़ रहमान को बांग्लादेशी राजनीति का ‘क्राउन प्रिंस’ कहा जाता है। शुरुआती पढ़ाई ढाका के BAF शाहीन कॉलेज से करने के बाद उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पढ़ाई की। 1988 में वे BNP के जनरल मेंबर बने और धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के तौर पर उभरे। 1991 में जब ख़ालिदा ज़िया प्रधानमंत्री बनीं, तब चुनाव प्रचार की कमान तारिक के हाथ में थी। अब 2026 में आगामी चुनावों में उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया जा रहा है।

तारिक रहमान पर 84 मुकदमे, दो बार गए जेल

तारिक़ रहमान पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और सत्ता के दुरपयोग जैसे आरोप में 84 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वे दो बार जेल भी जा चुके हैं। वे बांग्लादेश में सबसे कम उम्र में जेल जाने वाले व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते हैं। तारिक का नाम साल 2004 में आवामी लीग की रैली पर हुए ग्रेनेड हमले सहित कई गंभीर मामलों में आ चुका है। बांग्लादेश छोड़ने से पहले भी वे जेल काट चुके हैं।

हालाँकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम व्यवस्था के दौरान तारिक़ रहमान को सभी लंबित करीब 84 मामलों में बरी कर दिया गया। BNP इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है। BNP को उम्मीद है कि तारिक रहमान की वापसी से पार्टी कैडर में नई ऊर्जा आएगी और मतदाताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा। हालाँकि, आलोचक उन्हें भारत-विरोधी रुख और पुराने विवादों से जोड़कर देखते हैं।