पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पार्षद असीम बसु पर एक आश्रम में आए साधुओं को जबरन निकालने का आरोप लगा है। यह घटना कोलकाता के भवानीपुर स्थित भोलानंद गिरी आश्रम की है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों से कुछ साधु एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आश्रम पहुँचे थे। साधुओं का आरोप है कि वार्ड नंबर 70 के पार्षद असीम बसु अचानक आश्रम में घुस आए और उन्हें वहाँ से निकलने के लिए मजबूर किया।
साधुओं का कहना है कि पार्षद ने उन पर आरोप लगाया कि वे किसी राजनीतिक मकसद से यहाँ आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे नहीं गए तो उनके साथ मारपीट की जाएगी। इसके अलावा आश्रम की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने की धमकी भी दी गई। साधुओं ने आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे इलाके में धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए हिंदू धर्म का प्रचार कर रहे थे।
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें असीम बसु साधुओं पर चिल्लाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में वे साधुओं पर आरोप लगाते हैं कि वे इलाके के घरों में जा रहे हैं, पर्चे बाँट रहे हैं और वीडियो बना रहे हैं। खास बात यह है कि यह वीडियो खुद असीम बसु ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
वीडियो में वे पूछते दिखते हैं कि बाहर से आए साधु आश्रम में क्यों ठहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इलाके में अजनबी लोगों का घर-घर जाना चिंता का विषय है और ऐसे लोग भगवा पहने साधु के भेष में चोर भी हो सकते हैं।
उन्होंने साधुओं से उनके आने का कारण पूछा और कहा कि उन्हें आश्रम में रहने का कोई अधिकार नहीं है। जब साधुओं ने कहा कि वे धार्मिक संदेश देने आए हैं, तो पार्षद ने इस बात को नहीं माना और उन्हें तुरंत वहाँ से जाने के लिए कहा। असीम बसु ने यह भी आरोप लगाया कि साधु एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं और यह सब किसी राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने साधुओं के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराने की भी धमकी दी।
वहीं, बाद में मीडिया से बातचीत में साधुओं ने इन आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वे सिर्फ धार्मिक कार्य से लोगों के घर जा रहे थे।

