अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरी हैं। उनका कहना है कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार उनके सम्मान में स्वीकार किया। ट्रम्प ने यह बात शनिवार (11 अक्तूबर 2025) को एक प्रेस ब्रीफिंग में कही।
उन्होंने बताया कि माचाडो ने उन्हें फोन किया और कहा, “मैं यह पुरस्कार आपके सम्मान में स्वीकार कर रही हूँ, क्योंकि आप वास्तव में इसके हकदार हैं।” ट्रम्प ने हँसते हुए कहा, हालाँकि मैंने यह नहीं कहा कि फिर इसे मुझे दे दो।”
#WATCH | US President Donald J Trump says, "The person who got the Nobel Prize called me today and said, 'I'm accepting this in honour of you because you really deserved it'… I didn't say, 'Give it to me', though. I think she might have… I've been helping her along the… pic.twitter.com/XY1HH1OG5x
— ANI (@ANI) October 10, 2025
उन्होंने मचाडो की प्रशंसा की और कहा कि वे लंबे समय से वेनेज़ुएला में उनके प्रयासों का समर्थन करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “मैं उनकी हर कदम पर सहायता करता रहा हूँ। उन्हें वेनेजुएला में बहुत मदद की जरूरत है। यह एक बड़ी आपदा है।” उन्होंने वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका पर भी विचार किया और दावा किया कि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उनकी शांति पहलों ने लाखों लोगों की जान बचाई।
उन्होंने कहा, “आप यह भी कह सकते हैं कि यह 24 के लिए दिया गया था और मैं 2024 में चुनाव लड़ रहा था। लेकिन हमने इतना कुछ किया जितना उन्हें करना चाहिए था। मैं खुश हूँ क्योंकि मैंने लाखों लोगों की जान बचाई, कई लाखों लोगों की।”
लोकतंत्र के लिए मचाडो की लड़ाई को मान्यता
नोर्वेजियन नोबेल समिति ने उनका यह पुरस्कार इसलिए दिया क्योंकि उन्होंने वेनजुएला में लोकतांत्रिक अधिकारों (free speech, चुनाव की आजादी आदि) को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया। उन्होंने तानाशाही से लोकतंत्र की ओर एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण परिवर्तन लाने के लिए संघर्ष किया।
BREAKING NEWS
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 10, 2025
The Norwegian Nobel Committee has decided to award the 2025 #NobelPeacePrize to Maria Corina Machado for her tireless work promoting democratic rights for the people of Venezuela and for her struggle to achieve a just and peaceful transition from dictatorship to… pic.twitter.com/Zgth8KNJk9
नोबेल समिति के अनुसार, वेनेजुएला में विपक्ष का प्रमुख चेहरा मारिया कोरिना मचाडो को वेनेजुएला के लोगों के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक कार्य और तानाशाही से लोकतंत्र में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण संक्रमण प्राप्त करने के उनके संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन का विरोध करने वाली सबसे मजबूत आवाजों में से एक मचाडो वर्षों से वेनेजुएला के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति रही हैं।
व्हाइट हाउस ने की ट्रम्प की शांति विरासत की प्रशंसा
घोषणा के बाद व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन च्युंग ने ट्रम्प के काम की रक्षा की और नोबेल समिति पर राजनीति को शांति से ऊपर रखने का आरोप लगाया। च्युंग ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप शांति समझौते करते रहेंगे, युद्ध समाप्त करते रहेंगे और लोगों की जान बचाते रहेंगे। उनका दिल मानवतावादी है और उनके जैसा कोई नहीं होगा जो अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से पहाड़ों को हिला सके।”
President Trump will continue making peace deals, ending wars, and saving lives.
— Steven Cheung (@StevenCheung47) October 10, 2025
He has the heart of a humanitarian, and there will never be anyone like him who can move mountains with the sheer force of his will.
The Nobel Committee proved they place politics over peace. https://t.co/dwCEWjE0GE
मचाडो ने पुरस्कार वेनेजुएलावासियों और ट्रम्प को किया समर्पित
नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में मचाडो ने एक्स पर लिखा, “हम आजादी पाने के लक्ष्य को पूरा करने के मार्ग पर हैं। हम जीत की दहलीज पर हैं और आज, पहले से कहीं अधिक, हम राष्ट्रपति ट्रम्प, संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों, लैटिन अमेरिका के लोगों और दुनिया के लोकतांत्रिक देशों पर स्वतंत्रता और लोकतंत्र प्राप्त करने के लिए हमारे प्रमुख सहयोगियों के रूप में भरोसा करते हैं।”
This recognition of the struggle of all Venezuelans is a boost to conclude our task: to conquer Freedom.
— María Corina Machado (@MariaCorinaYA) October 10, 2025
We are on the threshold of victory and today, more than ever, we count on President Trump, the people of the United States, the peoples of Latin America, and the democratic…
नोबेल समिति ने एक बयान में कहा, “पिछले एक साल से सुश्री मचाडो को छिपकर रहने पर मजबूर होना पड़ा है। अपनी जान को गंभीर खतरों के बावजूद, वह देश में ही रहीं और इस फैसले ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है।”

