नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में वोटर लिस्ट को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिले के नेवादा और इटाही अब्दुल्ला गाँवों में चुनावी धाँधली का बड़ा ‘खेल’ सामने आया है।
यहाँ वोटर लिस्ट में ऐसे नाम दर्ज हैं जिनका धर्म सिस्टम भी नहीं पहचान पा रहा। कहीं वोटर हिंदू है तो पिता मुस्लिम, तो कहीं पति-पत्नी की धार्मिक पहचान अलग-अलग है। आरोप है कि नेपाल सीमा पार से लोगों को लाकर फर्जी वोटर बनाया गया ताकि चुनावी नतीजों और इलाके की डेमोग्राफी को बदला जा सके।
हिंदू नाम, मुस्लिम पिता: कागजों पर वोटर, जमीन पर गायब
‘आज तक’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता जबीउल्लाह ने चौंकाने वाले दस्तावेज दिखाए। वोटर लिस्ट में ‘जंग बहादुर’ नाम के व्यक्ति के पिता का नाम ‘मोहम्मद जब्बार’ दर्ज है।
इसी तरह रामनाथ चौहान के पिता का नाम भी मोहम्मद जब्बार लिखा है। हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों के मुताबिक गाँव में कोई ‘चौहान’ परिवार रहता ही नहीं है। आरोप है कि ये फर्जी नाम सिर्फ वोट डलवाने के लिए लिस्ट में जोड़े गए हैं और वोटिंग के बाद ये लोग गायब हो जाते हैं।
एक मकान नंबर, 50 वोटर और हिस्ट्रीशीटर प्रधान का कनेक्शन
जाँच में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा मकान नंबर 156 और 217 में मिला। मकान नंबर 156 पर 50 से ज्यादा वोटर दर्ज हैं, जबकि मकान मालिक का कहना है कि वहाँ सिर्फ 4-5 लोग रहते हैं।
वहीं, मकान नंबर 217 के मालिक शहीद अहमद हैं, जो वर्तमान प्रधान और हिस्ट्रीशीटर भी हैं। उनके पते पर भी 50 से अधिक नाम दर्ज हैं। आरोप है कि मौजूदा प्रधान और सपा नेताओं की मिलीभगत से एक ही परिवार के दर्जनों लोगों के नाम दो-दो ग्राम सभाओं की लिस्ट में डलवाए गए हैं ताकि पंचायत चुनावों में धांधली की जा सके।
प्रशासन की चुप्पी और जाँच के आदेश
इस गंभीर मामले पर एडीएम (ADM) बलरामपुर ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। हालाँकि, उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम (SDM) को टीम गठित कर जाँच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल चुनावी फर्जीवाड़ा नहीं, बल्कि सीमावर्ती इलाके में ह्यूमन ट्रैफिकिंग और घुसपैठ से जुड़ा एक बड़ा सुरक्षा खतरा भी हो सकता है।

